समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़-आज जब समाज में धर्म और जाति के नाम पर विभाजन की बातें अक्सर सुनाई देती हैं, ऐसे समय में पाकुड़ की इंसानियत फाउंडेशन मानवता की ऐसी मिसाल पेश कर रही है, जो यह साबित करती है कि रक्त का कोई धर्म नहीं होता, उसकी पहचान केवल जीवन बचाना है।
संस्था के कोषाध्यक्ष फरजान शेख ने एक बार फिर अपने कार्यों से यह संदेश दिया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।हिरणपुर प्रखंड की ट्यूमर पीड़ित बैजानती देवी,जिनका इलाज पाकुड़ सदर अस्पताल में चल रहा है, के ऑपरेशन के लिए ओ पॉजिटिव रक्त की तत्काल आवश्यकता थी। जैसे ही इसकी सूचना फरजान शेख को मिली, उन्होंने बिना देर किए पाकुड़ ब्लड बैंक पहुंचकर छठी बार रक्तदान किया और मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।रक्तदान के बाद फरजन शेख ने कहा, “हिंदू-मुस्लिम करने से किसी की जान नहीं बचती,लेकिन रक्तदान से किसी को नया जीवन जरूर मिल सकता है। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है और हमें इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।इसी कड़ी में चांचकी निवासी अकमल शेख ने भी मानवता की अनूठी मिसाल पेश की। उन्होंने 11वीं बार रक्तदान कर कोलापहाड़ी की साहिना बीबी को ए पॉजिटिव रक्त उपलब्ध कराया, जिनका सीजर ऑपरेशन होना था।समय पर रक्त मिलने से सुरक्षित उपचार संभव हो सका।इस दौरान ब्लड बैंक के कर्मचारी नवीन और पियूष दास भी मौजूद रहे और रक्तदाताओं के इस मानवीय प्रयास की सराहना की।
रक्तदान बना सामाजिक एकता का संदेश—
इंसानियत फाउंडेशन का यह प्रयास केवल रक्तदान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि संकट की घड़ी में न कोई हिंदू होता है,न मुसलमान-सिर्फ एक इंसान दूसरे इंसान की मदद के लिए खड़ा होता है।आज फरजन शेख और अकमल शेख जैसे रक्तवीर यह साबित कर रहे हैं कि सच्चा धर्म वही है, जो किसी की जिंदगी बचाने का काम करे। ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं और आने वाली पीढ़ियों को भाईचारे, सेवा और मानवता का वास्तविक अर्थ सिखाते हैं।खून का रंग एक है, इसलिए इंसानियत भी एक होनी चाहिए।यही संदेश इंसानियत फाउंडेशन अपने प्रत्येक रक्तदान अभियान के माध्यम से समाज तक पहुंचा रही है।
