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Maqsood Alam
(News Head)

हाईकोर्ट में मामला विचाराधीन,दुकानदारों ने मांगा समय,28 जुलाई को अंतरिम राहत पर होगी सुनवाई!

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़।नगर थाना क्षेत्र के दाग संख्या-1345 स्थित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को खाली कराने के लिए अंचल कार्यालय द्वारा जारी नोटिस के बाद मामला अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है. प्रभावित दुकानदारों ने अंचल अधिकारी,पाकुड़ को संयुक्त आवेदन सौंपकर कार्रवाई पर पुनर्विचार करने तथा न्यायालय में अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की है। वहीं,इसी भूमि विवाद से जुड़ी याचिका झारखंड हाईकोर्ट में लंबित है, जहां 28 जुलाई को अंतरिम राहत (इंटरिम प्रोटेक्शन) संबंधी आवेदन पर सुनवाई निर्धारित की गई है।
दुकानदारों का कहना है कि उन्हें 21 जुलाई 2026 तक दुकानें खाली करने का नोटिस दिया गया,जबकि जिस न्यायालयीन आदेश का हवाला दिया गया है, उसमें वे पक्षकार नहीं थे। उनका कहना है कि यदि उन्हें पहले जानकारी मिलती तो वे भी अदालत में अपना पक्ष रखते।

हम भूमि मालिक नहीं, किरायेदार हैं—

संयुक्त आवेदन में दुकानदारों ने स्पष्ट किया है कि वे संबंधित भूमि के स्वामी नहीं,बल्कि धर्मेंद्र सिंह के विधिवत किरायेदार हैं। उनका कहना है कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई या नोटिस भूमि स्वामी को दिया जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के तहत उन्हें अपील या रिवीजन दायर करने का अधिकार प्राप्त है,लेकिन नोटिस में इतना समय नहीं दिया गया कि वे कानूनी उपाय अपना सकें।दुकानदारों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया अपनाने का अवसर दिया जाए और अंतिम निर्णय आने तक कठोर कार्रवाई से परहेज किया जाए।

हाईकोर्ट में लंबित है मामला–

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इसी भूमि से संबंधित डब्ल्यू.पी.(सिविल) संख्या-1310/2026 झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है।दुकानदारों का कहना है कि जब तक न्यायालय अंतिम निर्णय नहीं दे देता,तब तक किसी प्रकार की जल्दबाजी में कार्रवाई उचित नहीं होगी।उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित भूमि नगर परिषद क्षेत्र के अंतर्गत आती है और क्षेत्राधिकार सहित कई कानूनी प्रश्न न्यायालय के विचाराधीन हैं।साथ ही वर्ष 2017 में प्रशासन की अनुमति से इसी स्थल पर भारतीय शिल्प उत्सव-सह-पुस्तक मेला एवं शैक्षणिक प्रतियोगिताओं का आयोजन भी कराया गया था।

28 जुलाई को अंतरिम राहत पर सुनवाई–

अधिवक्ता राहुल कुमार द्वारा जारी प्रमाण-पत्र के अनुसार,धर्मेंद्र सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट में दायर डब्ल्यू.पी. (सिविल)संख्या-1310/2026 के माध्यम से पूर्व में जारी नोटिसों को चुनौती दी है।याचिका में भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने संबंधी आदेशों को निरस्त करने तथा याचिकाकर्ता के शांतिपूर्ण कब्जे में हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश देने की मांग की गई है।प्रमाण-पत्र के अनुसार,6 जुलाई 2026 को अंचल अधिकारी ने खाता संख्या-588, दाग संख्या-1345 स्थित भूमि पर निर्मित भवन को हटाकर 21 जुलाई तक भूमि को पुनः तालाब के रूप में बहाल करने का नोटिस जारी किया था। इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने आई.ए.संख्या-9933/2026 दाखिल कर अंतरिम संरक्षण की मांग की है।मामले का उल्लेख न्यायालय के समक्ष किए जाने पर माननीय न्यायमूर्ति आनंद सेन ने अंतरिम आवेदन को 28 जुलाई 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। प्रमाण-पत्र में यह भी उल्लेख है कि अंतरिम आवेदन पर सुनवाई होने तक यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आग्रह किया गया है।

अब सबकी नजर 28 जुलाई की सुनवाई पर—

एक ओर दुकानदार प्रशासन से समय और न्यायिक प्रक्रिया अपनाने का अवसर मांग रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हाईकोर्ट में अंतरिम राहत की सुनवाई तय हो चुकी है। ऐसे में इस विवाद में अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम 28 जुलाई की सुनवाई के बाद सामने आने की संभावना है।

अंचलधिकारी के नोटिस में क्या लिखा है…..

नोटिस के अनुसार अंचल अधिकारी,पाकुड़ ने दाग संख्या 1345 में संचालित 8 दुकानों- व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 21 जुलाई 2026 तक खाली करने का निर्देश दिया है।

नोटिस की मुख्य बातें:–

नोटिस जिन प्रतिष्ठानों को जारी किया गया है, उनमें मॉन्टीकार्लो,बाबा लोकनाथ इंटरप्राइजेज, लक्ष्मी फर्नीचर एवं Godrej Interio, नारायण,रॉयल ट्रेडर्स, आस्था (The Wedding Studio), अजमेरा Trends तथा Distilled Water and Sofa Repairing शामिल हैं।

राजस्व अभिलेख एवं स्थानीय जांच के आधार पर बताया गया है कि मौजा-पाकुड़,खाता संख्या 588, दाग संख्या 1345 राजस्व रिकॉर्ड में “पोखर (तालाब)” के रूप में दर्ज है।

नोटिस में कहा गया है कि इस भूमि पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान चलाना बिहार काश्तकारी अधिनियम, 1949 की धारा-35 का उल्लंघन है।

इसमें झारखंड हाईकोर्ट के W.P.(C) No. 726/2014 तथा W.P.(C) No. 654/2015 का हवाला देते हुए कहा गया है कि संबंधित भूमि को तालाब के रूप में बहाल (Restoration) किया जाए और बिना वैधानिक प्रक्रिया के किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग न किया जाए

नोटिस में यह भी उल्लेख है कि भूमि मालिक को पहले 6 जुलाई 2026 को नोटिस दिया गया था तथा उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन के लिए निर्देश जारी किए गए हैं

अंत में निर्देश दिया गया है कि 21 जुलाई 2026 तक सभी दुकानें/व्यावसायिक प्रतिष्ठान खाली कर दिए जाएं, अन्यथा तालाब की बहाली (Restoration) के दौरान होने वाले किसी भी नुकसान के लिए संबंधित दुकानदार स्वयं जिम्मेदार होंगे

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