समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़।तिलभिठा मार्केट में पुलिस की छापेमारी के दौरान 420 ग्राम गांजा की बरामदगी और एक आरोपी की गिरफ्तारी महज एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि उस खामोश जहर की परत खोलती है जो धीरे-धीरे समाज की जड़ों को खोखला कर रहा है।उपरोक्त बातें प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कुमार गौरव ने पत्रकारों से कही. उन्होंने कहानशा केवल एक व्यक्ति को बर्बाद नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार की खुशियां छीन लेता है। कई घरों में मां-बाप की उम्मीदें टूट जाती हैं, बहनों की राखियां सूनी हो जाती हैं और बच्चों का भविष्य अंधेरे में चला जाता है। नशे की गिरफ्त में आने वाला युवा अक्सर अपराध, हिंसा और बर्बादी की राह पकड़ लेता है।मुफस्सिल थाना क्षेत्र के तिलभिठा मार्केट में चल रही अवैध गांजा बिक्री के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 420 ग्राम गांजा, दो कैंची और दो कटनी बरामद की। इस मामले में अफसर शेख को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जबकि फरार आरोपी गुलाब शेख की तलाश जारी है।लेकिन यह कार्रवाई कई सवाल भी छोड़ जाती है। आखिर इतनी भीड़भाड़ वाले बाजार में नशे का कारोबार कब से चल रहा था? क्या स्थानीय लोगों को इसकी भनक नहीं थी? या फिर डर और खामोशी ने नशा कारोबारियों के हौसले बुलंद कर दिए थे?
नशा माफिया का मकसद सिर्फ पैसा कमाना होता है। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनकी एक पुड़िया किसी मां की गोद सूनी कर सकती है, किसी पिता की उम्मीदें तोड़ सकती है या किसी युवा का पूरा भविष्य तबाह कर सकती है।पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली लड़ाई तभी जीती जाएगी जब समाज भी आगे आए। यदि हर नागरिक नशे के खिलाफ आवाज उठाए, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दे और अपने बच्चों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराए, तभी इस जहर की जड़ें कमजोर होंगी।आज सवाल सिर्फ 420 ग्राम गांजा का नहीं है, सवाल उन अनगिनत सपनों का है जो नशे की आग में हर रोज जल रहे हैं। आखिर और कितने घर उजाड़ेगा नशा माफिया.मौके पर मुफसिल थाना प्रभारी गौरव कुमार मौजूद थे.
