मकसूद आलम
गांधीनगर (गुजरात) कलम की ताकत लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति मानी जाती है, लेकिन जब उसी कलम को डर, धमकी,हमले और झूठे मुकदमों का सामना करना पड़े,तब सवाल केवल एक पत्रकार का नहीं,बल्कि पूरे लोकतंत्र का बन जाता है। इसी चिंता और संकल्प के साथ गुजरात की राजधानी गांधीनगर के उमिया फाउंडेशन सभागार में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति का राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित हुआ,जहां देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे करीब 850 पत्रकारों ने पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को राष्ट्रीय आंदोलन का स्वर दे दिया।इस अधिवेशन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि मंच पर सत्ता और विपक्ष दोनों के जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। गुजरात सरकार के कैबिनेट मंत्री कुँवरजी बावड़िया, राज्यमंत्री कांतिलाल अमरूतिया,विधायक धवलसिंह जाला, विधायक अरविंदभाई पटेल,आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इशुदान गढ़वी,पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी तथा कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता मनहर पटेल की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि पत्रकारों की सुरक्षा किसी दल की नहीं,बल्कि लोकतंत्र की साझा जिम्मेदारी है।
पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं,लोकतंत्र की सांस है—
राष्ट्रीय महासचिव महफूज़ खान ने अपने संबोधन में वर्षों से चल रहे संघर्ष को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2014 से जंतर-मंतर पर आंदोलन,धरना-प्रदर्शन और विभिन्न मंचों के माध्यम से पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग लगातार उठाई जाती रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2016 में तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को पत्रकारों पर हो रहे हमलों,फर्जी मुकदमों और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ज्ञापन सौंपा गया था।उन्होंने कहा कि पत्रकार केवल समाचार नहीं लिखता,बल्कि समाज की आवाज बनता है। यदि पत्रकार भयमुक्त नहीं होगा तो लोकतंत्र भी कमजोर होगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्पष्ट संदेश—
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जिग्नेश भाई कलावाडिया (पटेल) ने कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून अब समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।समाज की समस्याओं को उजागर करने वाले पत्रकारों को सुरक्षा और सम्मान मिलना ही चाहिए।उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल सुरक्षा कानून बनवाना नहीं,बल्कि निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहितकारी पत्रकारिता को मजबूत करना भी है।
क्या-क्या लिए गए महत्वपूर्ण संकल्प—
राष्ट्रीय अधिवेशन में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई—
पूरे देश में पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए राष्ट्रीय अभियान चलाया जाएगा।
राज्य और जिला स्तर तक संगठन का विस्तार किया जाएगा।
पत्रकारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
ग्रामीण एवं डिजिटल पत्रकारों को संगठन से जोड़ा जाएगा।
पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति तैयार की जाएगी।
देशभर से जुटी पत्रकारों की आवाज
अधिवेशन में उत्तर प्रदेश, बिहार,महाराष्ट्र, राजस्थान,छत्तीसगढ़ एवं झारखंड सहित कई राज्यों के पदाधिकारियों और पत्रकारों ने अपने विचार रखे। सभी ने एक स्वर में कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल मीडिया का मुद्दा नहीं, बल्कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रश्न है।
आज देश में पत्रकारों पर हमले, धमकियां, झूठे मुकदमे और दबाव की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में गांधीनगर का यह राष्ट्रीय अधिवेशन केवल एक संगठन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत संदेश माना जा रहा है। यदि पत्रकार निर्भय होकर सच लिख सकेगा, तभी जनता तक निष्पक्ष सूचना पहुंचेगी और लोकतंत्र की नींव मजबूत रहेगी।
पत्रकार सुरक्षित होगा, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा–
यही संदेश लेकर गांधीनगर से उठी यह आवाज अब देशव्यापी अभियान का रूप लेने की तैयारी में है।

