मकसूद आलम
कोटालपोखर-समय बदलता रहा, हुकूमतें बदलती रहीं, पीढ़ियां गुजरती रहीं… लेकिन साहेबगंज जिले के कोटालपोखर की ऐतिहासिक ‘चौधरी स्टेट’ आज भी अपने भव्य सिंह द्वार के साथ बीते गौरव की गवाही देती खड़ी है।इसकी जर्जर होती दीवारों पर समय की मार साफ दिखाई देती है,लेकिन इतिहास आज भी इन दीवारों में सांस लेता है।स्थानीय लोगों के अनुसार,इस भव्य राजबाड़ी का निर्माण कोटालपोखर के जमींदार इस्माईल चौधरी ने कराया था। कभी यह राजबाड़ी इलाके की शान,सम्मान और रुतबे का प्रतीक मानी जाती थी। यहां की चौधराहट केवल एक परिवार तक सीमित नहीं थी, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई थी।आजादी और देश के विभाजन के दौर में इतिहास ने करवट ली। बताया जाता है कि चौधरी परिवार तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) चला गया। बाद में ट्रांसफरेबल व्यवस्था के तहत बांग्लादेश के एक हिंदू बंगाली परिवार ने इस संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त किया। धीरे-धीरे समय की बेरुखी के साथ राजबाड़ी की रौनक भी धुंधली पड़ती चली गई।
लेकिन अब वर्षों बाद इस ऐतिहासिक धरोहर में फिर से नई जान फूंकी जा रही है–—
पाकुड़ के पूर्व विधायक अकील अख्तर द्वारा इस ऐतिहासिक राजबाड़ी को खरीदने के बाद इसके जीर्णोद्धार का कार्य तेजी से चल रहा है। राजस्थान के अनुभवी कारीगर पुराने राजमहलों की स्थापत्य शैली के अनुरूप इसे फिर से सजाने-संवारने में जुटे हैं। सबसे खास बात यह है कि इसकी ऐतिहासिक पहचान से कोई समझौता नहीं किया गया है।
सिंह द्वार… जो आज भी इतिहास का प्रहरी है—-
राजबाड़ी का मुख्य प्रवेश द्वार आज भी अपनी पुरानी भव्यता के साथ खड़ा है। वर्षों बीत जाने के बावजूद द्वार के ऊपर स्थापित सिंह की आदमकद प्रतिमा आज भी उसी शान से विराजमान है। जीर्णोद्धार के दौरान भी इस ऐतिहासिक द्वार और सिंह प्रतिमा से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है। यही इस विरासत के प्रति सम्मान और संरक्षण की सोच को दर्शाता है।
ग्रामीणों की उम्मीदें फिर जाग उठी हैं—
कोटालपोखर और आसपास के गांवों के बुजुर्ग बताते हैं कि एक समय इस राजबाड़ी की रौनक देखने दूर-दूर से लोग आया करते थे। यहां की ठाट-बाट, मेहमाननवाजी और राजसी संस्कृति पूरे इलाके की पहचान थी।अब जब राजबाड़ी फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट रही है, तो लोगों की उम्मीदें भी लौट आई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह विरासत फिर से आबाद होती है,तो कोटालपोखर की पहचान भी नए सिरे से स्थापित होगी। लोगों को विश्वास है कि क्षेत्र में फिर वही पुरानी रौनक,वही गौरव और वही चौधराहट देखने को मिलेगी।
सिर्फ इमारत नहीं… भावनाओं की विरासत—
चौधरी स्टेट केवल ईंट, पत्थर और चूने से बनी एक इमारत नहीं है। यह कोटालपोखर के इतिहास, संस्कृति, सामाजिक विरासत और बीते वैभव का जीवंत प्रतीक है। इसका पुनर्जीवन केवल एक भवन का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि उस इतिहास को फिर से जीवित करने का प्रयास है, जिसे समय लगभग भुला चुका था।जब यह राजबाड़ी पूरी तरह अपने नए स्वरूप में तैयार होगी,तब शायद केवल इसकी दीवारें ही नहीं चमकेंगी,बल्कि कोटालपोखर के इतिहास का वह सुनहरा अध्याय भी फिर से जीवंत हो उठेगा, जिसे लोग आज भी सम्मान और गर्व के साथ याद करते हैं।

