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Maqsood Alam
(News Head)

सवालों के जरिए सशक्त बन रहीं ग्रामीण किशोरियां,पुलिस अधिकारी ने दिया सुरक्षा का भरोसा

बाल अधिकार से लेकर साइबर अपराध तक हुई खुली बातचीत, किशोरियों ने बेझिझक रखे अपने सवाल और साझा कीं व्यवहारिक समस्याएं

मकसूद आलम 

पाकुड़- ग्रामीण इलाकों की किशोरियों के लिए सशक्तिकरण का मतलब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। सुरक्षित वातावरण,अपने अधिकारों की जानकारी,बदलते डिजिटल दौर की चुनौतियों को समझना और जरूरत पड़ने पर सही जगह आवाज उठाना भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के साथ चापाड़ांगा स्थित प्रशिक्षण केंद्र में ग्रामीण किशोरियों और पुलिस प्रशासन के बीच सीधे संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किशोरियों ने पुलिस प्रशासन के सामने अपनी जिज्ञासाएं और व्यवहारिक समस्याएं खुलकर रखीं।स्थानीय स्वयंसेवी संस्था फेस की ओर से आयोजित इस विशेष संवाद एवं जागरूकता सत्र में पाकुड़ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कुमार गौरव ने विभिन्न गांवों से पहुंची किशोरियों से सीधे संवाद किया। बातचीत का केंद्र केवल कानून और पुलिस व्यवस्था नहीं रहा, बल्कि किशोरियों की रोजमर्रा की सुरक्षा और उनके भविष्य से जुड़े सवाल भी रहे।

जब किशोरियों ने सीधे पुलिस अधिकारी से पूछे सवाल—

कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि किशोरियों को केवल सुनने की भूमिका में नहीं रखा गया। उन्हें अपनी बात कहने और सवाल पूछने का पूरा अवसर दिया गया। किशोरियों ने व्यक्तिगत सुरक्षा,महिलाओं की सुरक्षा, बाल अधिकार और साइबर अपराध जैसे विषयों पर सवाल पूछे।पुलिस अधिकारी कुमार गौरव ने किशोरियों के सवालों का सरल और व्यवहारिक तरीके से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की असुरक्षा, परेशानी या अनुचित व्यवहार को चुपचाप सहन करने के बजाय समय रहते संबंधित अधिकारियों या भरोसेमंद लोगों से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने किशोरियों को जागरूक,आत्मनिर्भर और सुरक्षित रहने के लिए प्रेरित किया।

सुरक्षा की पहली सीढ़ी है जागरूकता—

संवाद के दौरान यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जागरूकता से शुरू होने वाली सामूहिक जिम्मेदारी है। विशेषकर डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर अपराध से बचाव की जानकारी किशोरियों के लिए बेहद जरूरी है।किशोरियों को साइबर अपराध से बचने, अपनी निजी जानकारी और डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने तथा किसी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत सहायता लेने के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही बाल अधिकार और महिला सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी भी साझा की गई।

शिक्षा को बनाया सशक्तिकरण का आधार—-

कार्यक्रम में फेस के सचिव ऋतु पांडेय ने संस्था की ओर से बालिका शिक्षा, किशोर-किशोरी सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में संचालित विभिन्न पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बालिका शिक्षण, किशोर-किशोरी विकास एवं सशक्तिकरण, तथा एसबीआईएफ-आईएलएलएम  के तहत संचालित गतिविधियों का उल्लेख किया।उन्होंने बताया कि ड्रॉपआउट और अनियमित बालिकाओं को आधारभूत शिक्षा से जोड़ने के साथ-साथ समुदाय के विभिन्न वर्गों को शिक्षा, जागरूकता और कौशल विकास से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण किशोरियों को अपने भविष्य के फैसले खुद लेने में सक्षम बनाना है।

पुलिस और किशोरियों के बीच संवाद ने तोड़ी झिझक—

ग्रामीण क्षेत्र की किशोरियों के लिए पुलिस अधिकारी के सामने अपनी बात रखना कई बार आसान नहीं होता। लेकिन इस कार्यक्रम में सवाल-जवाब के माहौल ने उस झिझक को कम किया। किशोरियों ने अपनी जिज्ञासाएं रखीं और अधिकारी ने सहजता से उनका समाधान किया।इस संवाद का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कानून की जानकारी किताबों तक सीमित रहने के बजाय जब सीधे बच्चों और किशोरियों तक पहुंचती है, तो उसका असर अधिक व्यावहारिक होता है। किशोरियों को यह भरोसा मिला कि परेशानी की स्थिति में वे अपनी बात जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचा सकती हैं।

अच्छी भागीदारी की हुई सराहना—

एसडीपीओ कुमार गौरव ने किशोरियों के उत्साह, सहभागिता और कार्यक्रम के संचालन की सराहना की। उन्होंने भविष्य में भी आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया।कार्यक्रम को सफल बनाने में फेस के सदस्यों मेहबूब आलम, निकिता झा, देवज्योति बनर्जी, शहादत हुसैन, शमीमा, रिजवाना, अशरफ, हाफिजा और अकमल का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

संदेश साफ है-डर नहीं, जानकारी जरूरी है–

यह कार्यक्रम ग्रामीण किशोरियों के लिए केवल एक जागरूकता सत्र नहीं रहा, बल्कि उनके भीतर सवाल पूछने, अपनी बात रखने और अपने अधिकारों को समझने का एक अवसर बना। शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के बीच सीधा संबंध स्थापित करते हुए संवाद ने यह संदेश दिया कि जिस किशोरी को अपने अधिकार और सुरक्षा के उपायों की जानकारी है, वह अपने भविष्य को लेकर अधिक मजबूत निर्णय ले सकती है।ग्रामीण समाज में ऐसे संवाद लगातार होते रहें तो किशोरियों और प्रशासन के बीच भरोसे की दूरी कम होगी और सुरक्षा के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी नई ताकत मिलेगी।मौके पर संस्था की सचिव ऋतू पाण्डेय,रतन कुमार सिंह उर्फ़ पिंटू सिंह, डॉक्टर सोवेंडू मंडल, शहादत हुसैन आदि मौजूद थे.

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