मकसूद आलम
पाकुड़। हिरणपुर थाना क्षेत्र के सहरपुर स्थित काजू बागान में 1 जून 2024 की शाम हुई सामूहिक दुष्कर्म की वह वारदात,जिसने पूरे पाकुड़ जिले को झकझोर दिया था,अब अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंच गई है। करीब दो साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम, पाकुड़ कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने मामले में शामिल सभी नौ आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्राकृतिक जीवन के अंत तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने जुर्माने से प्राप्त पूरी राशि पीड़िता को मानसिक और शारीरिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया है।साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पाकुड़ को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत पीड़िता के लिए अतिरिक्त उचित मुआवजा निर्धारित करने का आदेश दिया गया है।
जब शाम की सैर बन गई जिंदगी की सबसे भयावह रात—
प्राथमिकी के अनुसार, 1 जून 2024 की शाम करीब 6:30 बजे 19 वर्षीय पीड़िता अपने पति के साथ हिरणपुर थाना क्षेत्र के सहरपुर स्थित काजू बागान में घूमने गई थी। दोनों शायद यह सोचकर निकले थे कि कुछ समय प्रकृति के बीच सुकून से बिताएंगे, लेकिन कुछ ही देर में उनकी जिंदगी का सबसे भयावह अध्याय शुरू हो गया।इसी दौरान कई युवक वहां पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने पीड़िता के पति को पकड़कर बंधक बना लिया। इसके बाद पीड़िता को जबरन अपने कब्जे में लेकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। आरोपियों ने उसके कपड़े फाड़ दिए और उसे झाड़ियों की ओर ले जाकर बारी-बारी से वारदात को अंजाम दिया।घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। पीड़िता और उसके परिवार के लिए यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि ऐसा आघात था,जिसकी पीड़ा लंबे समय तक साथ रहने वाली थी।
अगले दिन दर्ज हुआ मामला, शुरू हुई पुलिसिया कार्रवाई—
घटना के संबंध में हिरणपुर थाना में कांड संख्या 35/2024, दिनांक 2 जून 2024 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए। मामला आगे बढ़ते हुए न्यायालय पहुंचा और सत्र वाद संख्या 143/2024 के तहत सुनवाई शुरू हुई।इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह महत्वपूर्ण गवाहों को न्यायालय में पेश किया गया। उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने सभी नौ आरोपियों को दोषी माना।
एक-एक कर सामने आए नौ दोषी—
अदालत ने जिन नौ आरोपियों को दोषी करार दिया है, उनमें—
- मानवेन मरांडी (28)
- चंदन सोरेन उर्फ चांद सोरेन (29)
- विवेक सोरेन (22)
- लखीराम मृधा उर्फ बाबूलाल मरांडी (22)
- जेने हांसदा (27)
- विश्वनाथ हेम्ब्रम (24)
- पांडु हेम्ब्रम (30)
- मिस्त्री हेम्ब्रम (30)
- सकल हांसदा (34)
सभी आरोपी ग्राम कस्तूरी,थाना हिरणपुर,जिला पाकुड़ के निवासी बताए गए हैं।
कम उम्र का तर्क नहीं आया काम—
सजा के चरण में बचाव पक्ष की ओर से आरोपियों की कम उम्र का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की गई। लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।न्यायालय ने अपने फैसले में अपराध की गंभीरता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि पूरे सभ्य समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे जघन्य अपराधों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि कानून के प्रति लोगों का विश्वास कायम रहे और भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
‘काजू बागान कांड’ बना था जिले में चर्चा का विषय—
घटना के बाद काजू बागान सामूहिक दुष्कर्म कांड लंबे समय तक जिले में चर्चा का विषय बना रहा। सुनसान इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा, ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस गश्त और अपराधियों में कानून का भय जैसे सवाल भी उठे थे।
इस मामले में अब अदालत के फैसले ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि जघन्य यौन अपराधों में कानून की प्रक्रिया भले समय ले, लेकिन गंभीर अपराधों को न्यायिक जांच से गुजरना होगा और दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड से अपराधियों को बचना आसान नहीं होगा।
पीड़िता के लिए मुआवजे का भी रास्ता साफ—
फैसले का एक महत्वपूर्ण पक्ष पीड़िता के पुनर्वास और मुआवजे से जुड़ा है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर लगाए गए 50 हजार रुपये के जुर्माने की 100 प्रतिशत राशि पीड़िता को देने का निर्देश दिया है।इसके अतिरिक्त डीएलएसए, पाकुड़ को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत पीड़िता के लिए उचित अतिरिक्त मुआवजा तय करने को कहा गया है। यानी फैसला केवल दोषियों को दंडित करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पीड़िता को हुए मानसिक और शारीरिक नुकसान की भरपाई की दिशा में भी न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है।
फैसले ने फिर खड़ा किया बड़ा सवाल-महिलाओं की सुरक्षा कितनी पुख्ता?
काजू बागान की यह घटना केवल एक मुकदमे की कहानी नहीं है। यह सवाल भी छोड़ जाती है कि ग्रामीण और सुनसान इलाकों में महिलाओं की सुरक्षा कितनी मजबूत है? क्या ऐसे स्थानों पर नियमित पुलिस गश्त होती है? क्या अपराध की आशंका वाले इलाकों की पहचान कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाती है?अदालत का फैसला निश्चित रूप से दोषियों के लिए कठोर संदेश है। लेकिन समाज के लिए भी यह सोचने का समय है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता, पुलिस निगरानी और महिलाओं की सुरक्षा के इंतजामों को कितना मजबूत किया जाए।काजू बागान की उस शाम ने पाकुड़ को झकझोर दिया था। अब अदालत का यह फैसला उन सवालों के बीच एक स्पष्ट संदेश बनकर सामने आया है—महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराध को किसी भी कीमत पर हल्के में नहीं लिया जा सकता।
