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अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। एक दौर था जब पाकुड़ जिले में शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतरी हुई थी। न तो स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति उत्साहजनक थी और न ही अभिभावकों में पढ़ाई को लेकर कोई जागरूकता। माहौल शिक्षा के अनुकूल नहीं था, शिक्षक अपनी ईमानदारी से ड्यूटी जरुर निभाते, पर न छात्रों का स्कूल से जुड़ाव बन पाता और न ही शिक्षा विभाग की सक्रियता दिखती। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में एक शिक्षक आगे आए, जिन्होंने अन्य शिक्षकों और विभाग से समन्वय बनाकर ना सिर्फ इस व्यवस्था को बदला, बल्कि जिले में शिक्षा की अलख जगाई। नाम है विश्वनाथ पंडित, जिन्हें आज पूरा जिला आदर से ‘पंडित सर’ के नाम से जानता है। पूरे व्यवस्था में बदलाव लाने में पंडित सर की भूमिका को हमेशा याद किया जाएगा। हालांकि इसमें उस वक्त पंडित सर की टीम में शामिल कई शिक्षकों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने कदम से कदम मिलाकर पंडित सर के साथ हमेशा खड़े रहे।
चुनौतियों से मुकाबला कर बनाया पढ़ाई का माहौल
एक शिक्षक के रूप में विश्वनाथ पंडित के सामने उस वक्त चुनौती केवल बच्चों को पढ़ाने की नहीं, बल्कि एक ऐसा समन्वय स्थापित करने की थी जहां विभाग, स्कूल, शिक्षक और छात्र एक धागे में पिरोए जा सकें। उन्होंने शिक्षकों को एकजुट कर एक मंच पर लाया, अभिभावकों के बीच जाकर उन्हें बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूक किया और कक्षाओं का माहौल ऐसा बनाया कि बच्चों का लगाव किताबों से हो गया।
ईमानदारी की मिसाल, प्रशासन का मिला अटूट भरोसा
विश्वनाथ पंडित की ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की छवि पूरे पाकुड़ जिले में मिसाल बनी। उनकी मजबूत साख के कारण ही जिला प्रशासन बड़े व राष्ट्रीय पर्वों के सफल आयोजन की रणनीतिक टीम में उन्हें प्रमुखता से शामिल करने लगा। यहां बताना जरूरी होगा कि विश्वनाथ पंडित को उस वक्त कई और भी शिक्षकों का भरपूर साथ मिला, जिन्होंने शिक्षा विभाग और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस या शिक्षा विभाग का कोई भी बड़ा अभियान हो, पंडित सर और उनकी टीम की भूमिका हमेशा निर्णायक रही।
सेवानिवृत्ति के बाद भी जारी है निस्वार्थ योगदान
पंडित सर सालों पहले अपनी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी शिक्षा औरं समाज सेवा के प्रति उनका जज्बा कम नहीं हुआ। आज भी वे शिक्षा के क्षेत्र में अपना मार्गदर्शन और अमूल्य योगदान दे रहे हैं।
शिक्षकों के लिए बने ‘संकटमोचक’ और सर्वमान्य चेहरा
पंडित सर न केवल एक बेहतरीन शिक्षक और कुशल आयोजक रहे हैं, बल्कि सेवानिवृत्त होने के बाद भी पूरे शिक्षक समुदाय के संरक्षक बने हुए हैं। आज भी जिले के किसी शिक्षक को प्रशासनिक या व्यक्तिगत परेशानी होती है, तो सबसे पहले विश्वनाथ पंडित का नाम ही ध्यान में आता है। उन्होंने अपने व्यक्तित्व से साबित कर दिखाया है कि एक सच्चा शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता, बल्कि जीवनभर समाज और व्यवस्था का मार्गदर्शन करता रहता है।
