कुंदन रविदास@समाचार चक्र
हिरणपुर। कल्याण गुरुकुल हिरणपुर में प्रशिक्षण लेकर रोजगार की राह पकड़ चुके युवाओं का हौसला बढ़ाने के लिए गुरुवार को प्राचार्य प्रवीण सिंह चेन्नई पहुंचे। उन्होंने गौरीशंकर के साथ चेन्नई स्थित इंटिमेट फैशन कंपनी का दौरा कर वहां कार्यरत कल्याण गुरुकुल के चयनित युवाओं से मुलाकात की। प्राचार्य के अचानक पहुंचने से युवाओं में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला।इस दौरान प्रवीण सिंह ने युवाओं से केवल उनके कामकाज की जानकारी ही नहीं ली, बल्कि उनके रहने की व्यवस्था, कार्यस्थल का माहौल और कंपनी की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने युवाओं के अनुभव सुने और यह जानने का प्रयास किया कि प्रशिक्षण के बाद रोजगार मिलने के सफर में उन्हें किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
रोजगार मिलने से बदली उम्मीद की तस्वीर—
युवाओं ने बताया कि कल्याण गुरुकुल में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें रोजगार का अवसर मिला, जिससे वे काफी खुश हैं। अपने घर और क्षेत्र से दूर चेन्नई में रहकर वे पूरी मेहनत और लगन के साथ कंपनी में काम कर रहे हैं। युवाओं ने प्राचार्य के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि प्रशिक्षण ने उन्हें रोजगार के योग्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।प्राचार्य ने युवाओं से कहा कि यदि कार्यस्थल या रहने के दौरान किसी प्रकार की परेशानी आती है तो वे तत्काल जानकारी दें। उन्होंने युवाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा।
मौका मिला है तो इसे सफलता में बदलें—
प्रवीण सिंह ने युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि मेहनत, अनुशासन और लगन सफलता की सबसे मजबूत सीढ़ियां हैं। रोजगार का अवसर मिलना मंजिल नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की शुरुआत है। युवाओं को अपने कौशल को लगातार बेहतर करते रहना चाहिए और कंपनी में मिले इस अवसर का पूरी ईमानदारी एवं जिम्मेदारी के साथ सदुपयोग करना चाहिए।उन्होंने युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि आज ये युवा अपने हुनर के दम पर रोजगार हासिल कर रहे हैं, तो कल यही सफलता क्षेत्र के दूसरे बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी।
गुरुकुल की पहल से गांवों तक पहुंच रहा रोजगार का संदेश—
कल्याण गुरुकुल हिरणपुर से प्रशिक्षण प्राप्त कर विभिन्न कंपनियों में युवाओं का चयन होना क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। प्रशिक्षण के बाद जब युवा अपने पैरों पर खड़े होकर परिवार की जिम्मेदारियां संभालने लगते हैं, तो इसका असर केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज में आत्मनिर्भरता और रोजगार के प्रति विश्वास पैदा करता है।चेन्नई में काम कर रहे इन युवाओं की कहानी भी इसी बदलाव की तस्वीर पेश करती है-हुनर मिला, अवसर मिला और अब मेहनत के दम पर भविष्य संवारने की कोशिश जारी है।चाहें तो मैं इसे और ज्यादा दमदार “दैनिक भास्कर की स्पेशल स्टोरी” शैली में, शुरुआत में एक मार्मिक मानवीय पैराग्राफ और 2-3 आकर्षक सबहेडिंग के साथ भी तैयार कर सकता हूं।

