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Maqsood Alam
(News Head)

खनन की कमाई अब विकास की राह पर: डीएमएफटी में 70 प्रतिशत पैसा शिक्षा-पानी-स्वास्थ्य पर, 30 प्रतिशत सड़क-पुल पर खर्च होगा

खनन प्रभावित इलाकों की बदलेगी तस्वीर?डीएमएफटी की बैठक में जनहित की योजनाओं पर मंथन, स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़।खनिज संपदा से मिलने वाली राशि का लाभ अब खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों तक पहुंचाने की कवायद तेज हो गई है। गुरुवार को समाहरणालय सभागार में हुई जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) न्यास परिषद की बैठक में विकास योजनाओं को लेकर व्यापक मंथन हुआ। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त सह न्यास परिषद की अध्यक्ष मेघा भारद्वाज ने की।बैठक में साफ किया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में डीएमएफटी की 70 प्रतिशत राशि उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर खर्च होगी, जबकि 30 प्रतिशत राशि आधारभूत संरचना के विकास में लगाई जाएगी।

पहले पानी,स्वास्थ्य और शिक्षा-फिर सड़क-पुल—

डीएमएफटी की राशि से पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और स्वच्छता जैसी मूलभूत जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं शेष राशि से सड़क, पुल-पुलिया, सिंचाई और अन्य आधारभूत संरचनाओं को मजबूत किया जाएगा।बैठक में यह भी जोर दिया गया कि योजनाएं केवल कागजों पर स्वीकृत होकर न रह जाएं, बल्कि खनन प्रभावित गांवों में उनका सीधा असर दिखाई दे।

स्थानीय उत्पादों से रोजगार पैदा करने की तैयारी—

डीएमएफटी को सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। जेएसएलपीएस की दीदियों और उद्यमी दीदियों को सहयोग देने के साथ पटसन, कचु, महुआ और चिरौता जैसे स्थानीय उत्पादों के व्यवसाय एवं प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की योजना पर विचार किया गया।मकसद साफ है,स्थानीय संसाधन गांव में ही रोजगार और आमदनी का जरिया बनें।

उपायुक्त ने दिया गुणवत्ता और पारदर्शिता का संदेश—

उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डीएमएफटी से योजनाओं का चयन जनहित, वास्तविक जरूरत और खनन प्रभावित क्षेत्रों की प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

अब असली चुनौती जमीन पर असर दिखाने की—

बैठक में योजनाओं के प्रस्तावों पर सहमति और चर्चा जरूर हुई, लेकिन डीएमएफटी की सफलता का असली पैमाना खनन प्रभावित गांवों की बदली हुई तस्वीर होगी। जिन इलाकों से खनिज संपदा निकलती है, वहां यदि बेहतर पानी, स्वास्थ्य सुविधा,शिक्षा, सड़क और रोजगार पहुंचता है, तभी डीएमएफटी की राशि का वास्तविक उद्देश्य पूरा माना जाएगा।

कौन कौन थे मौजूद…

सांसद बिजय हांसदा,विधायक हेमलाल मुर्मू, प्रोफेसर स्टेफन मरांडी,समाजसेवी सह व्यवसाई लुत्फ़ल हक सहित जिले के आला अधिकारी एवं सदस्य मौजूद थे.

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