समाचार चक्र संवाददाता
लिट्टीपाड़ा-आज के दौर में मोबाइल और इंटरनेट जितना सुविधाजनक है, साइबर अपराधियों के लिए यह उतना ही बड़ा हथियार बनता जा रहा है। एक अनजान कॉल, एक संदिग्ध लिंक या लालच भरा संदेश…और कुछ ही पलों में मेहनत की कमाई खाते से गायब हो सकती है। इसी खतरे को लेकर लिट्टीपाड़ा थाना पुलिस ने प्लस टू उच्च विद्यालय लिट्टीपाड़ा में छात्र-छात्राओं के बीच साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर डिजिटल सतर्कता का पाठ पढ़ाया।पुलिस निरीक्षक जॉन मुर्मू के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। पुलिस ने बच्चों को समझाया कि साइबर ठगी से बचने का सबसे मजबूत हथियार कोई तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि सावधानी और जागरूकता है।
ओटीपी बताया तो समझिए खतरा दरवाजे पर है—
पुलिस निरीक्षक जॉन मुर्मू ने छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से आगाह करते हुए कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी पासवर्ड, बैंक खाता, एटीएम या अन्य वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। साइबर अपराधी अक्सर बैंक अधिकारी, पुलिस, रिश्तेदार, कंपनी प्रतिनिधि या अन्य परिचित बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय भी विशेष सावधानी बरतें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने, निजी जानकारी साझा करने और संदिग्ध संदेशों का जवाब देने से बचें।
एक क्लिक से पहले सौ बार सोचें—
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, संदिग्ध कॉल से सावधान रहने और फर्जी लॉटरी, इनाम या नौकरी के झांसे में नहीं आने की सलाह दी गई। पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी करने वाले अपराधी लोगों के लालच, डर और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं।ऐसे में कोई भी संदेश या कॉल कितना ही भरोसेमंद क्यों न लगे, बिना सत्यापन के किसी लिंक पर क्लिक करना या पैसे भेजना भारी पड़ सकता है।
ठगी हो जाए तो घबराएं नहीं, तुरंत करें शिकायत—-
पुलिस ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे चुप बैठने या घबराने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। साथ ही cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।पुलिस का संदेश स्पष्ट था,साइबर अपराध से बचाव केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर मोबाइल उपयोगकर्ता की जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक- शिक्षिकाओं ने भी विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया। मौके पर पुलिस बल के जवान, विद्यालय के शिक्षक- शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
बच्चों को जागरूक करना यानी पूरे परिवार को सुरक्षित करना—
विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि आज बच्चे स्वयं मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और कई बार घर के बड़े भी डिजिटल लेन-देन में उनकी मदद लेते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा की जानकारी देना केवल उन्हें सुरक्षित करना नहीं, बल्कि पूरे परिवार को साइबर ठगी के खतरे से आगाह करना है।
