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Maqsood Alam
(News Head)

गांव की बेटी ने रचा इतिहास: मानसी सिंघा ने लगातार दूसरी बार जीता गोल्ड, 9.75 सीज़ीपीए के साथ बनी यूनिवर्सिटी टॉपर

महेशपुर के सिलमपुर जैसे छोटे गांव से निकलकर डीएसपीएमयू की एमएससी वनस्पति विज्ञान में हासिल की पहली रैंक 2025 में भी जीत चुकी हैं स्वर्ण पदक

मकसूद आलम की रिपोर्ट

पाकुड़-महेशपुर प्रखंड के छोटे से गांव सिलमपुर की मानसी सिंघा ने अपनी मेहनत और लगन से एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बड़े सपनों के लिए बड़े शहर से होना जरूरी नहीं। संसाधनों की सीमाओं के बीच पढ़ाई करते हुए मानसी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (डीएसपीएमयू), रांची की एमएससी वनस्पति विज्ञान परीक्षा में 9.75 सीज़ीपीए के साथ प्रथम स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें 24 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाएगा।खास बात यह है कि यह मानसी का लगातार दूसरा स्वर्ण पदक होगा। इससे पहले वर्ष 2025 में उन्होंने सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका से बीएससी वनस्पति विज्ञान ऑनर्स में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान हासिल करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। उस समय उन्होंने केकेएम कॉलेज, पाकुड़ का प्रतिनिधित्व किया था।

एक छोटे गांव से यूनिवर्सिटी टॉपर तक का सफर

मानसी की सफलता सिर्फ दो स्वर्ण पदकों की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे परिवार की कहानी भी है, जहां शिक्षा को पीढ़ियों से आगे बढ़ाने की परंपरा रही है।मानसी ने अपनी शुरुआती शिक्षा महेशपुर में प्राप्त की। उनके पिता साधन सिंघा और मां अनामिका सिंघा, दोनों शिक्षक हैं। उनके मौसा-मौसी भी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं। परिवार की इस शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने मानसी को बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर बनाया।परिवार में शिक्षा की इस परंपरा को आगे बढ़ाने में उनकी दादी दीपाली सिंहा,जो स्वयं पूर्व शिक्षिका रही हैं, की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। परिवार के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने मानसी को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

दूसरी बार गोल्ड,लेकिन सफर अभी बाकी

एक के बाद एक दो विश्वविद्यालयों में टॉप करना मानसी की निरंतर मेहनत को दर्शाता है। बीएससी में गोल्ड मेडल के बाद एमएससी में भी विश्वविद्यालय टॉपर बनना उनके अकादमिक प्रदर्शन की निरंतरता का प्रमाण है।मानसी की उपलब्धि विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं और युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई हैं। उनका प्रदर्शन यह संदेश देता है कि सीमित संसाधन प्रतिभा के रास्ते में स्थायी बाधा नहीं बनते, यदि विद्यार्थी में लगन, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प हो।

मानसी ने सफलता का श्रेय परिवार और गुरुजनों को दिया

अपनी इस उपलब्धि का श्रेय मानसी ने अपने माता-पिता, नानी, मौसा-मौसी, बहन और शिक्षकों को दिया है। उन्होंने विशेष रूप से अपने शिक्षक एवं मार्गदर्शक डॉ. प्रसंजित मुखर्जी के शैक्षणिक मार्गदर्शन और प्रोत्साहन को महत्वपूर्ण बताया।मानसी का कहना है कि परिवार का निरंतर सहयोग और गुरुजनों का मार्गदर्शन ही उनकी सफलता की मजबूत नींव रहा।

महेशपुर से पाकुड़ तक खुशी की लहर

मानसी की उपलब्धि से उनके परिवार और सिलमपुर गांव में खुशी का माहौल है। महेशपुर प्रखंड से निकलकर लगातार दूसरी बार विश्वविद्यालय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल करना पाकुड़ जिले के लिए भी गौरव की बात मानी जा रही है।डीएसपीएमयू के वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. ईश्वरी प्रसाद गुप्ता ने मानसी सिंघा को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धि पर बधाई दी है। विभाग के डॉ. अशोक कुमार नायक, डॉ. विद्यायन, डॉ. रश्मि मिश्रा और डॉ. अपर्णा सिन्हा ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

सिर्फ मेडल नहीं,एक संदेश भी-

मानसी की कहानी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि प्रतिभा को अवसर और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो गांव की गलियों से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर की पहचान बनाई जा सकती है।दो वर्षों में दो गोल्ड मेडल और अब 9.75 सीज़ीपीए के साथ यूनिवर्सिटी टॉपर-मानसी सिंघा की उपलब्धि महेशपुर, पाकुड़ और पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय है। अब उनकी नजर उच्च शिक्षा और शिक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए अपनी इस शैक्षणिक यात्रा को नई ऊंचाई देने पर है।

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