समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। इंजीनियरिंग कॉलेज के तीन साल सिर्फ डिप्लोमा हासिल करने का समय नहीं,बल्कि करियर की मजबूत नींव रखने और खुद को एक बेहतर इंसान के रूप में तैयार करने का दौर है। पाकुड़ पॉलिटेक्निक में शुक्रवार को नए सत्र के विद्यार्थियों के लिए आयोजित अभिमुखीकरण कार्यक्रम में उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने विद्यार्थियों को इसी सोच के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी।नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उपायुक्त ने कहा कि कॉलेज के तीन वर्ष जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और ऊर्जा से भरपूर वर्षों में से हैं। इनका सदुपयोग नियमित पढ़ाई,अनुशासन,सकारात्मक सोच और नए कौशल सीखने में होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पढ़ाई उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि वे अपने माता-पिता और परिवार की उम्मीदों के साथ यहां आए हैं।
किताबों से आगे सीखने पर जोर–
उपायुक्त ने विद्यार्थियों को संस्थान की प्रयोगशालाओं और उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मनोरंजन तक सीमित रखने के बजाय नई तकनीक, शैक्षणिक सामग्री और रोजगारपरक कौशल सीखने में करने की बात कही।
उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ कम से कम एक नया कौशल सीखने और पियर लर्निंग को बढ़ावा देने की अपील की। उनका कहना था कि कॉलेज में बनने वाली अच्छी मित्रता और शिक्षकों से विकसित होने वाला मार्गदर्शक संबंध भविष्य में भी काफी उपयोगी साबित होता है।
घर से दूर आए विद्यार्थियों को भी दिया भरोसा—
पहली बार घर और परिवार से दूर आए विद्यार्थियों का जिक्र करते हुए उपायुक्त ने कहा कि शुरुआती दिनों में नए माहौल में असहजता या होम सिकनेस होना स्वाभाविक है। लेकिन समय के साथ यही संस्थान उनके जीवन की यादगार यात्रा का हिस्सा बन जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कॉलेज के इन तीन वर्षों को पूरी सकारात्मकता के साथ जीने, सीखने और खुद को विकसित करने का आह्वान किया।
स्वास्थ्य,खेल और अनुशासन भी जरूरी—
मेघा भारद्वाज ने कहा कि देश की युवा शक्ति ही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए तकनीकी शिक्षा के साथ स्वास्थ्य और शारीरिक मजबूती पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि खेल केवल शरीर को स्वस्थ नहीं रखते, बल्कि टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, सहयोग और अनुशासन भी विकसित करते हैं। विद्यार्थियों को नशे और अन्य हानिकारक आदतों से दूर रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक बनने के साथ अपनी संस्कृति, संस्कार और गुरुजनों के सम्मान की परंपरा को भी बनाए रखना जरूरी है।

अच्छी संगति चुनें, नशे से दूर रहें—
पाकुड़ पॉलिटेक्निक के उप निदेशक आलोक कुमार ने विद्यार्थियों को अच्छी संगति और सकारात्मक परिवेश का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि अभिभावक कठिन परिस्थितियों में मेहनत कर बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए भेजते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है कि वे उनकी उम्मीदों पर खरा उतरें।उन्होंने विद्यार्थियों से विषय समझने में परेशानी होने पर शिक्षकों से सवाल पूछने और हॉस्टल के स्टडी आवर का सदुपयोग करने की अपील की। साथ ही संस्थान की गरिमा और प्रतिष्ठा बनाए रखने का संदेश दिया।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ प्लेसमेंट पर फोकस—
संस्थान के निदेशक अमिया रंजन बड़ाजेना ने कहा कि अभिभावकों ने बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ अपने बच्चों को पाकुड़ पॉलिटेक्निक भेजा है। संस्थान की कोशिश है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर प्रायोगिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।उन्होंने कहा कि नियमित पढ़ाई, बेहतर उपस्थिति, अनुशासन और मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के लिए बेहतर करियर अवसर उपलब्ध कराने को लेकर संस्थान लगातार प्रयास कर रहा है। पाकुड़ पॉलिटेक्निक के विद्यार्थी देश की विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों और संस्थानों में काम कर रहे हैं।

10 साल पूरे कर चुका है पाकुड़ पॉलिटेक्निक—
प्राचार्य डॉ. सुषमा यादव ने नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए बताया कि वर्ष 2016 में स्थापित पाकुड़ पॉलिटेक्निक ने 2026 में दस वर्ष पूरे कर लिए हैं। संस्थान में डिप्लोमा इंजीनियरिंग के साथ वर्ष 2023 से बीसीए की पढ़ाई भी संचालित हो रही है।उन्होंने कहा कि बदलती तकनीकी जरूरतों के अनुसार संस्थान अपनी सुविधाओं और अवसरों का लगातार विस्तार कर रहा है। आधुनिक प्रयोगशालाओं और प्रशिक्षण के जरिए विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
ओरिएंटेशन में दिखी विद्यार्थियों की प्रतिभा—
कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रस्तुतियां भी दीं। पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन, सुविधाओं, तकनीकी शिक्षा और रोजगार की संभावनाओं से परिचित कराने के साथ उनके भीतर आत्मविश्वास पैदा करना रहा।

