ललन झा@समाचार चक्र
अमड़ापाड़ा-बदहाल सड़क और संवेदनहीन प्रशासनिक व जनप्रतिनिधियों के रवैये पर ग्रामीण युवाओं का आक्रोष भड़का। बर्षाती पानी का जमाव और दर्जनों तालाब नुमा गड्ढों में तब्दील सड़कों की नहीं सुधर रही दशा पर युवकों ने अपने धैर्य को खोया। आजिज व मजबूर हो जर्जर सड़क के नवनिर्माण को ले सड़क पर उतर गए। सुबह नौ बजे से बाजार के पोखरिया मोड़ सहित मुर्गी चौंक के अलावे कोल लिंक पथ के पीपीएल मोड़ पर आम जनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सांकेतिक रूप से चक्का जाम कर दिया। बहू लंबित जन समस्याओं के निदान की आश में स्थानीय वाहन भी स्वैक्षिक रूप से खड़े रहे। इस सार्वजनिक कल्याण के मुद्दे पर ग्रामीण भी प्रदर्शन कारियों के समर्थन में उतर आए। युवकों की टोलियों ने जिला प्रशासन हाय-हाय, कोल कंपनियां होश में आओ के अलावे सरकार के खिलाफ भी जमकर नारे लगाए। युवाओं ने क्षेत्र के सांसद महोदय से भी पूछा है कि यदि झारखंड की सड़कें सुंदर हैं तो अमड़ापाड़ा की मुख्य व सहायक सड़कों की यह दुर्दशा क्यों ? कब सुधरेंगी बाजार व पोखरिया बाईपास सड़क ? कब तक होगा बाजार का सौंदर्यीकरण ?
प्रशासन और कोल कंपनी बीजीआर व डीबीएल की कार्य शैली पर जताई नाराजगी—
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युवाओं ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि एक दफा नहीं, कई वार हमलोगों ने उपायुक्त को उनके दफ्तर में अपना मांग पत्र सौंपा। उनसे गुहार लगाई। आश्वासन के अलावे अब तक कुछ नहीं मिला। मीडिया कर्मियों से मुखातिब युवाओं ने कहा कि क्षेत्र में दो-दो कोल कंपनियां पिछले छह-सात सालों से संचालित हैं। करोड़ों का व्यापार रोज हो रहा है लेकिन क्षेत्र की प्रभावित जनता की शुध इन बड़ी कंपनियों को नहीं है।
लक्जरियस एसी कारों पर चलने वाले और सुविधायुक्त कमरों में रहने वाले अफसर जनता की पीड़ा से हैं बेखबर—
सड़क पर डंटे क्षेत्र के युवाओं ने कहा कि अगर अफसर संवेदन शून्य नहीं होते तो सड़कों पर जानलेवा गड्ढे नहीं बनते। सड़क तालाब का शक्ल नहीं लेता। रोज दुर्घटनाएं नहीं होतीं। कहा कि इन अफसरों को क्या, ये तो लक्जरियस कार पर चलते हैं।एसी में रहते हैं और कागजों पर ही जनता का कल्याण कर देते हैं। अगर शासन-प्रशासन संवेदनशील होती तो जनहित में पिछले दो-तीन सालों के दौरान कोई न कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था हो गई होती। युवाओं ने यह सवाल भी किया कि यदि ये कोल कंपनियां सरकार व प्रशासन के अधीन हैं तो बीजीआर व डीबीएल की कार्यशैली तानाशाही जैसा क्यों ?

कोल वाहक डंपरें रहीं जाम ऑटो टोटो चालक भी जमे सड़क निर्माण के समर्थन में—
सोमवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे से कोल लिंक पथ पर पीपीएल मोड़ के निकट सैकड़ों कोल डंपर अपनी जगह खड़े रहे। ऑटो-टोटो चालक भी सड़क की बदहाली से आक्रोषित दिखे और अपनी वाहनों को खड़ा कर दिया। चालकों ने कहा कि सड़क की दशा ऐसी है कि कब हादसा हो जाए कहना मुश्किल है।
जामस्थल पर चार बजे तक नहीं पहुंचे कोई प्रशासनिक अधिकारी या उनके प्रतिनिधि—
जानकारी मिली कि उत्पन्न इस स्थिति से अवगत होने कोई स्थानीय या जिले के प्रशासनिक अधिकारी अथवा प्रतिनिधि स्थल पर नहीं पहुंचे। प्रदर्शनकारी युवाओं ने बताया कि हम सबों का मकसद सिर्फ सड़क की बदहाल सूरत को बदलवाने की दिशा में मजबूत पहल की ठोस मांग है। अगर प्रशासन संवेदनशील बना रहेगा तो हमारा आंदोलन अनिश्चित कालीन व उग्र होगा। हालांकि, खबर भेजे जाने तक कोल वाहक डंपरों को छोड़ सभी वाहन अपने गंतव्य तक आवाजाही करते दिखे। सोमवार का सांकृतिक विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक और शांति पूर्ण रहा।इधर जाम की खबर मिलते ही डीबीएल ने अपने प्रतिनिधि राजेश कर्ण और बीजीआर ने सुरेश सिंह को जाम स्थल पर भेजा।साकारात्मक वार्ता और सड़क निर्माण कार्य शुरू करने की पहल पर विरोध समाप्त हुआ।चक्का जाम खत्म किया गया। कोल वाहक वाहनों की आवाजाही भी सुचारू हुई।

