ललन झा@प्रभात मंत्र
अमड़ापाड़ा।बाजार के मुख्य सड़क पर गत शुक्रवार को वृद्धा पार्वती देवी की भीख मांगती घिसटती, बेहद भावुक कर देने वाली तश्वीर सामने आई है। बिल्कुल दीन-हीन व क्षीण शरीर। बगल से गुजरते हर शख्स को निहारतीं धुंधली आंखें। सूखती हलक। शब्दों की अभिव्यक्ति में असमर्थ होठ। मदद की आश में बमुश्किल फैलाते हाथ। मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला यह जीवंत तश्वीर किसी भी हृदय को द्रवित कर सकता है। यह मर चुकी अमानवीय आत्मा की क्रूरता की तश्वीर किसी भी प्रबुद्ध को अवसाद में ला सकती है। बेशक, शासन-सत्ता की अव्यवस्था की तश्वीर है यह। यह किसी वृद्ध की ऐसी दुर्दशा की तश्वीर है जो हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर इसका जिम्मेवार कौन ?
पतन की ओर बढ़ता सामाजिक और परिवारिक नैतिक मूल्य—
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वास्तविकता यह है कि अक्सर हमारे समाज में बुजुर्गों की खराब दशा से जुड़ी बातें देखने-सुनने को मिल जाती हैं। हमारे यहां वृद्ध सुरक्षित नहीं।अब भी हमारा समाज और परिवार सहजता से बुजुर्गों को स्वीकार नहीं कर पाता। रिश्ते-नाते कहने को रह जाते हैं। उनके प्रति जो सम्मान और सहानुभूति परिवार और समाज को रखनी चाहिए, नहीं रख पाते। सहानुभूति से दो कदम आगे हमारी जो सहभागिता होनी चाहिए वो निर्वहन नहीं कर पाते। अपने कर्तव्य को भूल चुके हैं हम। खास कर वैसे बुजुर्ग जो निर्बल और असहाय हैं। जिनको परिवार बोझ समझने लगता है। जवानी के दिनों में परिवार के लिए किए गए उनके जीतोड़ मेहनत को भुला दिया जाता है। जिनके पास नहीं रह जाता है आय का कोई आर्थिक जरिया। ऐसे में, इस जिंदगी से मौत भली। किन्तु, मौत भी तो मौत चाहने वालों के वश में नहीं।
वृद्धा ने कहा,मेरा कोई अपना नहीं—
सामाजिक सुरक्षा की धज्जी उड़ाती बासमती हाय स्कूल टोले की इस वृद्धा से जब रूबरू हुआ तो बोलीं, मेरा कोई अपना नहीं। दो रोटी की जुगाड़ नहीं। गत रात बहू ने मेरे गाल पर थप्पड़ मारा। रोज प्रताड़ित होती हूं।भीख नहीं मांगू तो कैसे जीऊं बेटा !
बीडीओ को वृद्धा की दशा से कराया अवगत—-
बीडीओ प्रमोद गुप्ता को फोन पर पर्वती देवी की दुर्दशा से अवगत कराया। उनसे प्रशासनिक और मानवीय संवेदना के तहत पहल की मांग की। बताया कि मैंने संबंधित मुखिया को समुचित सहयोग का निर्देश दे दिया है।
