समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़।रक्त का कोई रंग नहीं होता, लेकिन जब यही रक्त किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने के लिए किसी की नसों से निकलकर रक्त अधिकोष तक पहुंचता है,तो उसमें इंसानियत की सबसे खूबसूरत तस्वीर दिखाई देती है।पाकुड़ में सितंबर महीने में आयोजित तीन रक्तदान शिविरों ने इसी मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की है।18,24 और 28 सितंबर को जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित रक्तदान शिविरों में कुल 306 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया।यह महज एक आंकड़ा नहीं,बल्कि उन 306 संभावित जिंदगियों के लिए उम्मीद है, जिन्हें कभी दुर्घटना,प्रसव,बीमारी या किसी आपात स्थिति में रक्त की जरूरत पड़ सकती है।
किसी अनजान के लिए दिया अपना खून—
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रक्तदान करने वाला व्यक्ति अक्सर यह नहीं जानता कि उसके रक्त की एक-एक बूंद किस मरीज तक पहुंचेगी।उसे यह भी पता नहीं होता कि सामने वाला कौन है,किस परिवार से है और उसकी कहानी क्या है। फिर भी वह अपना रक्त देता है, क्योंकि उसके लिए सबसे बड़ा परिचय सिर्फ ‘इंसान’ होना है।पाकुड़ के इन शिविरों में शहर से लेकर गांव तक के युवाओं,युवतियों और महिलाओं ने आगे बढ़कर रक्तदान किया।सामाजिक संस्थाओं,एनजीओ,फाउंडेशन और विभिन्न विभागों के पदाधिकारी-कर्मियों ने भी इस अभियान में सहभागिता निभाई। खनन,पुलिस और शिक्षा विभाग समेत कई विभागों तथा जेएसएलपीएस का सहयोग भी अभियान को मजबूती देता रहा।
306 यूनिट के पीछे हैं सैकड़ों संवेदनशील चेहरे—
इन 306 यूनिट रक्त के पीछे सैकड़ों ऐसे चेहरे हैं, जिन्होंने अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर किसी अनजान जरूरतमंद के लिए रक्त दिया। किसी के लिए यह पहली बार था,तो किसी ने नियमित रक्तदान की अपनी जिम्मेदारी को आगे बढ़ाया।जिला प्रशासन के अनुसार,ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं, युवतियों और महिलाओं की भागीदारी ने इस अभियान को और व्यापक बनाया। यह बदलती सोच का संकेत है कि रक्तदान अब केवल किसी परिचित या रिश्तेदार की जरूरत तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में भी देखा जा रहा है।
दुर्घटना से प्रसव तक… वक्त पर रक्त ही बनता है जिंदगी की डोर—
पाकुड़ जैसे भौगोलिक रूप से सुदूर जिले में आपात स्थिति में समय पर रक्त मिलना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति हो, प्रसव के दौरान रक्त की जरूरत से जूझ रही महिला हो या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज-ऐसे समय में रक्त की उपलब्धता परिवार के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण बन सकती है।कई बार अस्पताल में इलाज संभव होता है, डॉक्टर मौजूद होते हैं, लेकिन रक्त की तत्काल जरूरत पूरी न हो पाने से स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है। ऐसे में रक्त अधिकोष में उपलब्ध रक्त किसी परिवार के लिए सिर्फ एक यूनिट नहीं, बल्कि जीवन की डोर बन जाता है।
उपायुक्त ने जिलावासियों को कहा धन्यवाद—
इस उपलब्धि पर उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने सभी रक्तदाताओं,सामाजिक संस्थाओं,एनजीओ,फाउंडेशन, विभागीय पदाधिकारी-कर्मियों और जिलेवासियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि तीन शिविरों में 306 यूनिट रक्त का संग्रह पाकुड़वासियों की मानवीय संवेदनशीलता,सामाजिक जिम्मेदारी और जनसेवा की भावना को दर्शाता है।उपायुक्त ने रक्तदान को जीवनदायी सेवा बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा दान किया गया एक यूनिट रक्त जरूरतमंद के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुहिम अभी खत्म नहीं हुई है...
306 यूनिट रक्त संग्रह के साथ यह अभियान समाप्त नहीं हुआ है। जिला प्रशासन की ओर से आने वाले महीनों में भी नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करने की योजना है। जरूरत के अनुसार एक दिवसीय या दो दिवसीय शिविरों के माध्यम से रक्तदान अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।प्रशासन ने उन एनजीओ,सामाजिक संस्थाओं, एसोसिएशन,फाउंडेशन और संगठनों से भी आगे आने की अपील की है, जो अब तक इस अभियान से नहीं जुड़ पाए हैं।
क्योंकि रक्तदान में देने वाला अपना कुछ नहीं खोता,लेकिन किसी अनजान परिवार को वह सबसे अनमोल चीज दे सकता है उम्मीद।
