समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। वर्षों तक इंसाफ की राह तक रहे पीड़ित परिवार को आखिरकार न्याय की देवी ने संबल प्रदान किया है। महेशपुर थाना क्षेत्र के चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाले दोहरे हत्याकांड में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (प्रथम) कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने खूनी वारदात को अंजाम देने वाले 10 मुख्य दोषियों को उम्रकैद (आजीवन सश्रम कारावास) की सख्त सजा सुनाई है, वहीं साक्ष्य और ठोस सबूतों के अभाव में दो आरोपी महिलाओं को सहसम्मान बरी कर दिया है। अदालत ने बीते 1 अक्टूबर 2026 को ही सभी 10 आरोपियों को गुनाहगार करार दिया था, जिस पर अंतिम मुहर लगाते हुए आज सजा का फरमान सुनाया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक लुकास कुमार हेंब्रम ने मामले की प्रभावी पैरवी की, जिसमें कुल 8 चश्मदीदों व गवाहों की गवाही न्याय की मुख्य कड़ी बनी।
रक्तरंजित शाम और साजिश की खौफनाक दास्तान
विज्ञापन
यह सनसनीखेज वारदात 17 जून 2023 की शाम करीब 5:00 बजे महेशपुर के गणेशपुर गांव में अंजाम दी गई थी। वादी लखिराम मुर्मू की शिकायत के मुताबिक, पुरानी रंजिश और सोची-समझी साजिश के तहत एक गैरकानूनी मजमे ने कुल्हाड़ी, लाठी, डंडे और पत्थरों से लैस होकर उनके परिवार पर बर्बर हमला बोला था। घात लगाकर किए गए इस प्राणघातक हमले में लखिराम के दो बेटों वकील मुर्मू और देवीधन मुर्मू की मौके पर ही तड़प-तड़पकर मौत हो गई थी। बीच-बचाव करने पहुंची बेटी टुडू और अन्य परिजनों को भी आरोपियों ने बख्शा नहीं और उन्हें लहूलुहान कर दिया।
पुलिस तफ्तीश से सजा के मुकाम तक
घटना के बाद पुलिस ने महेशपुर थाना कांड संख्या 98/23 के तहत मामला दर्ज किया। शुरुआती प्राथमिकी में 37 नामजद व अन्य अज्ञात पर आरोप था, लेकिन पुलिस की गहन जांच के बाद 40 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। अदालती सुनवाई के दौरान 12 आरोपियों पर संज्ञान लिया गया।
बरी हुईं महिलाएं
बाले किस्कू और सोना मरांडी उर्फ चीनी मरांडी को आईपीसी की धारा 120 बी सहित तमाम आरोपों में साक्ष्य के अभाव के चलते दोषमुक्त घोषित कर दिया गया।
सलाखों के पीछे पहुंचे ये 10 गुनाहगार
प्रधान सोरेन, ताहा सोरेन उर्फ डेनेक, रामजी सोरेन, रमेश सोरेन, ईश्वर सोरेन, लिलू सोरेन, सोहन हेंब्रम, रोशन सोरेन उर्फ राजेन सोरेन, बीपी सिंह सोरेन और कालिदास सोरेन को सजा सुनाई गई है।
