विज्ञापन

प्रभात मंत्र@संवाददाता
पाकुड़। आईपीएल के रोमांच के साथ शहर में सट्टा का बाजार भी चरम पर पहुंच गया है। शहर से लेकर गांव तक सट्टेबाजी का जाल फैल चुका है। यूं कहे गली मोहल्लों से लेकर गुप्त ठिकानों तक सट्टेबाजी का कारोबार तेजी से फैलता दिख रहा है। नौसीखिए और युवा वर्ग आसान कमाई के लालच में इस जाल में फंसकर आर्थिक नुकसान उठा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार शहर और ग्रामीण इलाकों में प्रतिदिन करोड़ों का सट्टा का खेल चल रहा हैं। मैच के हर ओवर, चौके-छक्के और जीत-हार पर दांव लगाए जा रहे हैं। कई लोग शुरुआती छोटे मुनाफे के लालच में बड़ी रकम गंवा बैठते हैं। बताया जाता है कि सट्टा कारोबार से जुड़े लोग नए युवाओं को फंसाकर मोटी रकम ऐंठ रहे हैं।जिससे कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं।लोगों का कहना है कि आईपीएल का सीजन आते ही सट्टा बाजार सक्रिय हो जाता है और नौसीखियों को बड़े मुनाफे का झांसा देकर लूटा जाता है। इस अवैध कारोबार के कारण युवाओं में गलत प्रवृत्ति बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि इस पर सख्त निगरानी और कार्रवाई जरूरी है। ताकि युवाओं को इस दलदल में फंसने से रोका जा सके। पाकुड़ के बुद्धिजीवी के द्वारा प्रशासन और पुलिस से सट्टा पर रोक लगाने की मांग भी उठने लगी है।
विज्ञापन

विज्ञापन

हर चौके-छक्के रन, विकेट पर लगती हैं बोली
आईपीएल के साथ सट्टा कारोबार भी तेजी से सक्रिय हो जाता है। जानकार बताते हैं कि यह नेटवर्क स्थानीय स्तर से लेकर बड़े गिरोहों तक फैला होता है।जहां मैच के हर पहलू-रन, विकेट, चौके-छक्के और जीत-हार पर दांव लगाए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार सट्टा लगाने वालों में कुछ पेशेवर सटोरियों के साथ-साथ जल्दी मुनाफा कमाने के लालच में फंसने वाले नौसीखिए भी शामिल होते हैं। मोबाइल, सोशल मीडिया, कॉल और गुप्त व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए दांव लगाए जाने की बात सामने आती रही है। कई बार छोटे एजेंट लोगों को जोड़ते हैं और रकम बड़े नेटवर्क तक पहुंचती है। बताया जाता है कि इस पूरे खेल में तथाकथित मास्टर माइंड पर्दे के पीछे रहकर नेटवर्क संचालित करते हैं। ये लोग एजेंटों के जरिए रेट तय करना, दांव लगवाना, भुगतान कराना और हार-जीत का हिसाब नियंत्रित करते हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ लोग बिचौलिया की भूमिका निभाते हैं। जबकि बड़े संचालक खुद सामने नहीं आते। विशेषज्ञों का मानना है कि सट्टा कारोबार में सबसे ज्यादा नुकसान नौसीखियों को होता है, जिन्हें बड़े मुनाफे का लालच देकर जाल में फंसाया जाता है। कई युवा कर्ज और आर्थिक संकट तक पहुंच जाते हैं।
लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचने के लिए सिर्फ छोटे खिलाड़ियों पर नहीं, बल्कि इसके मास्टर माइंड और पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई जरूरी है। प्रशासन से भी ऐसे नेटवर्क पर कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही हैं।
कौन हैं बुकी, कैसे चलता है नेटवर्क, कौन हैं मास्टरमाइंड?
आईपीएल के साथ शहर में सट्टेबाजी का नेटवर्क फिर सक्रिय होने की चर्चा है। सूत्र बताते हैं कि यह कारोबार सिर्फ दांव लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि एजेंट, बुकी और कथित मास्टरमाइंड के नेटवर्क पर टिका होता है। सूत्रों की माने तो मोबाइल कॉल, मैसेजिंग ऐप और गुप्त ग्रुप के जरिए रेट चलाए जाते हैं। छोटे एजेंट नए लोगों को जोड़ते हैं, जबकि बुकी दांव और हिसाब संभालते हैं। सूत्रों की मानें तो बड़े संचालक पर्दे के पीछे रहकर पूरे खेल को नियंत्रित करते हैं।
कैसे काम करता है नेटवर्क?
लोकल एजेंट पंटर जोड़ते हैं, बुकी दांव और रेट संभालते हैं, हार-जीत का हिसाब अलग चैनल से चलता है,बड़े नेटवर्क तक रकम पहुंचने की बात कही जाती है।
नौसीखिए कैसे फंसते हैं?
शुरुआत छोटे दांव और मुनाफे के लालच से होती है। फिर धीरे-धीरे लोग बड़े नुकसान में चले जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि कई युवा आर्थिक संकट तक पहुंच जाते हैं।
ये सवाल उठ रहे हैं
कौन चला रहा है नेटवर्क? किसके संरक्षण में चल रहा खेल? क्या सिर्फ छोटे खिलाड़ी पकड़े जाते हैं?
मास्टरमाइंड तक कार्रवाई कब?प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर। लोग मांग कर रहे हैं कि सिर्फ छिटपुट कार्रवाई नहीं,बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच हो।तभी अरबों और खरबों का खेल का पता चल पायेगा।
इन इलाकों में एक्टिव हैं सटोरिए
पाकुड़ शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सटोरियों की सक्रियता है। इनमें चांचकी, जानकीनगर, संग्रामपुर, रहसपुर, झिकरहटी जैसे गांव शामिल हैं। इन गांवों के कई युवा सट्टेबाजों के चंगुल में फंसकर लाखों के कर्ज में डूबे हुए हैं और सटोरिए लखपति करोड़पति बने बैठे हैं। आज भर यहीं तक, पढ़ते रहिए…. अगले अंक में सटोरियों के नाम-पते के खुलासा का प्रयास रहेगा।


