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Maqsood Alam
(News Head)

शर्मनाक: लाभ से वंचित डीएमएफटी फंड के असली हकदार, दोहरे मापदंड के हो रहे शिकार

खनन प्रभावित क्षेत्र की तस्वीरों से उठ रहे सवाल

Gunjan Saha
(Desk Head)

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अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। डिस्टिक मिनिरल फाऊंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड खनन प्रभावित क्षेत्र और परिवारों के कल्याण के लिए हैं। इस राशि का इस्तेमाल खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे विकास कार्यों के लिए किया जाना है। लेकिन पाकुड़ में पत्थर खनन क्षेत्र में बसे गांवों की तस्वीर बेहद ही चिंताजनक है। यह ना सिर्फ चिंताजनक, बल्कि सरकार के लिए शर्मनाक भी कह सकते हैं। इनमें पाकुड़ के मालपहाड़ी पत्थर उद्योग क्षेत्र में आने वाले राजबांध गांव भी शामिल है। जिसकी तस्वीर सरकार और प्रशासन के कागजी विकास पर सवाल खड़े करते हैं। इस गांव में रहने वाले ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं केवल नाम मात्र के हैं। पत्थर खनन से करोड़ों का राजस्व देने वाला यह गांव बेहतर सुविधाओं के लिए तरसता नजर आ रहा है। एक तरफ डीएमएफटी फंड से शहर को चमकाया जा रहा है। करोड़ों के बिल्डिंग, डैम, गार्डवाल और पीसीसी सड़क उन क्षेत्रों में बन रहा है, जो इस फंड के सही हकदार भी नहीं है। इसके विपरीत डीएमएफटी के फंड के लाभ से खनन प्रभावित राजबांध गांव के ग्रामीण वंचित नजर आ रहे हैं। गांव के आस-पास कई पत्थर खदानें संचालित है। जिससे करोड़ों रुपए डीएमएफटी फंड में जमा होते है। इस फंड से गांव में मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त किया जा सकता है। लेकिन विडंबना है कि राजबांध गांव में सुविधाओं की घोर कमी है। हालत यह है कि सरकार और प्रशासन के दोहरे मापदंड की वजह से गांव से पानी निकासी के लिए नाला तक नहीं बन पाई है। पुरानी पीसीसी सड़क जर्जर होने की स्थिति में है। पेयजल की खास व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों के लिए सबसे जरूरी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं शिक्षा व्यवस्था की दयनीय हालत है। एकमात्र प्राथमिक स्कूल का नजारा सरकार और प्रशासन के कागजी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। एकमात्र प्राथमिक विद्यालय राजबांध की दो छोटी-छोटी भवनों की हालत उतनी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है जैसे किसी तरह स्कूल को चलाया जा रहा है। विडंबना है कि स्कूल की घेराबंदी तक नहीं की गई है। जिससे कि बच्चे सुरक्षित होकर पढ़ाई करें। दोहरे मापदंड का परिणाम देखिए कि आजकल स्कूलों में पानी के लिए आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) जैसी सुविधाएं दी जा रही है। यहां तक कि नल से भी पानी की आपूर्ति होती है। वहीं डीएमएफटी में करोड़ों का फंड पहुंचाने वाला खनन प्रभावित राजबांध गांव की एकमात्र प्राथमिक विद्यालय में ऐसी कोई सुविधा नहीं है। विद्यालय परिसर में चापाकल तो है, पर दूसरे स्कूलों की तरह यहां आरओ, पानी टंकी या नल की व्यवस्था बिल्कुल भी नहीं है। अब सवाल उठता है कि क्या यहां के बच्चें इन सुविधाओं के हकदार नहीं हैं? पत्थर खनन प्रभावित यहां के ग्रामीणों को पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं नहीं मिलनी चाहिए? यह बात बिल्कुल भी नहीं भुलना चाहिए कि डीएमएफटी फंड के असली हकदार पहले खनन क्षेत्र के प्रभावित गांव और ग्रामीण है।

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