Homeपाकुड़पाकुड़ से ऑक्सफोर्ड तक: अनाथ बच्चों के जीवन पर शोध को मिली...
Maqsood Alam
(News Head)

पाकुड़ से ऑक्सफोर्ड तक: अनाथ बच्चों के जीवन पर शोध को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता

पाकुड़ के शोधकर्ता को अंतरराष्ट्रीय पहचान, ऑक्सफोर्ड सम्मेलन में गूंजेगी अनाथ बच्चों की आवाज

Gunjan Saha
(Desk Head)

विज्ञापन

add

मकसूद आलम 

विज्ञापन

add

विज्ञापन

add

पाकुड़-झारखंड के पाकुड़ जैसे छोटे जिले से निकलकर सामाजिक सरोकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शोध अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाने जा रहा है।सामाजिक कार्य के शोधकर्ता एलेक्स सैम और उनकी टीम द्वारा तैयार शोधपत्र को दुनिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक आयोजनों में शामिल 7 वीं ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन चिल्ड्रेन एंड यूथ (GCCY-2026) में प्रस्तुति के लिए स्वीकृति मिल गई है।यह सम्मेलन अगस्त 2026 में ऑक्सफोर्ड (यूनाइटेड किंगडम) में आयोजित होगा।सम्मेलन की वैज्ञानिक समिति ने कठोर डबल-ब्लाइंड पीयर रिव्यू प्रक्रिया के बाद शोधपत्र को चयनित किया है। यह उपलब्धि न केवल एलेक्स सैम और उनकी टीम के लिए,बल्कि पूरे झारखंड और विशेष रूप से पाकुड़ जिले के लिए गौरव का विषय बन गई है।

अनाथालय बनाम परिवार: किस माहौल में बेहतर होता है बच्चों का विकास—-

स्वीकृत शोधपत्र का विषय है,अनाथालयों एवं फोस्टर केयर में रहने वाले बच्चों और परिवारों में पलने-बढ़ने वाले बच्चों का वैचारिक एवं सामाजिक अध्ययन।”शोध में यह जानने का प्रयास किया गया है कि विभिन्न देखभाल व्यवस्थाओं में रहने वाले बच्चों की पहचान,भावनात्मक विकास,सामाजिक व्यवहार और मानसिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है।अध्ययन यह भी बताता है कि बच्चों को केवल आश्रय ही नहीं,बल्कि अपनापन,सुरक्षा और भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता होती है।

निजी संघर्ष बना शोध की प्रेरणा–

एलेक्स सैम का यह शोध केवल अकादमिक अध्ययन नहीं,बल्कि जीवन के अनुभवों से निकला एक संवेदनशील प्रयास भी है।स्वयं अनाथालय में जीवन बिताने वाले एलेक्स सैम ने अपने संघर्षों और अनुभवों को समाज के सामने लाने का कार्य किया है।उनका मानना है कि अनाथ बच्चों को अक्सर समाज केवल दया की दृष्टि से देखता है,जबकि उनमें भी प्रतिभा,आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य गढ़ने की क्षमता होती है।यही सोच इस शोध की मूल प्रेरणा बनी।

विशेषज्ञों की टीम ने जोड़ी मजबूती—

शोध कार्य को मजबूत बनाने में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने सहयोग दिया। टीम में सामाजिक कार्य विभाग,के.के.एम. कॉलेज पाकुड़ की डॉ.स्वीटी मरांडी,बाल कल्याण समिति के पूर्व अध्यक्ष डॉ. शंभू कुमार यादव, सामाजिक प्रभाव अध्ययन विशेषज्ञ डॉ.लिडिया आर. कॉन्गर तथा शिक्षाविद डॉ. रेजॉयस सोलोमन शामिल हैं।इन विशेषज्ञों ने बाल संरक्षण,मनोविज्ञान,समाजशास्त्र और नीति निर्माण के दृष्टिकोण से अध्ययन को समृद्ध बनाया।

नीति निर्माण में भी होगा उपयोगी—

विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध बाल कल्याण,फोस्टर केयर और वैकल्पिक देखभाल व्यवस्था से जुड़ी नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इससे सरकारों,सामाजिक संगठनों और बाल अधिकारों पर काम करने वाली संस्थाओं को बच्चों के हित में बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

पाकुड़ के लिए गर्व का क्षण—

एक छोटे जिले से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंची यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा और समर्पण किसी भौगोलिक सीमा के मोहताज नहीं होते। ऑक्सफोर्ड में होने वाले इस सम्मेलन में जब एलेक्स सैम और उनकी टीम अपना शोध प्रस्तुत करेगी, तब यह केवल एक शोधपत्र की प्रस्तुति नहीं होगी, बल्कि उन हजारों अनाथ और वंचित बच्चों की आवाज होगी,जिनके जीवन और भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में यह अध्ययन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

RELATED ARTICLES

Recent Comments