विज्ञापन

मकसूद आलम
पाकुड़-नगर थाना क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के पीछे आखिरकार एक अंतरराज्यीय गिरोह का नाम सामने आया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लाखों रुपये के जेवर,लैपटॉप, मोटरसाइकिल और अन्य सामान बरामद किया है। लेकिन इस कार्रवाई ने कई नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं।प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरफ्तार सभी आरोपी पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के रहने वाले हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ चार लोगों का गिरोह था,या इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? पुलिस सूत्रों की मानें तो जिस तरह अलग-अलग तारीखों में बंद घरों को निशाना बनाया गया, उससे स्पष्ट है कि वारदातें अचानक नहीं,बल्कि पूरी योजना और रेकी के बाद अंजाम दी गईं।सूत्र बताते हैं कि अपराधी पहले इलाके की गतिविधियों पर नजर रखते थे।यह पता लगाया जाता था कि कौन-सा घर कई दिनों से बंद है,परिवार बाहर गया है या नहीं,और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था कैसी है। मौका मिलते ही रात के अंधेरे में ताला तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया जाता था।पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन जांच अभी जारी है।अधिकारियों को आशंका है कि गिरोह के अन्य सदस्य भी सक्रिय हो सकते हैं,जो अब तक गिरफ्त से बाहर हैं।पुलिस यह भी पता लगा रही है कि चोरी का सामान किन लोगों तक पहुंचाया जाता था और क्या इसके पीछे कोई रिसीवर (खरीदार) का नेटवर्क भी काम कर रहा था।इस पूरे मामले में एक और अहम सवाल यह है कि क्या यह गिरोह सिर्फ नगर थाना क्षेत्र तक सीमित था,या जिले के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की घटनाओं में शामिल रहा है।पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक इतिहास और मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।
यदि जांच में इस नेटवर्क का पूरा खुलासा होता है, तो यह केवल चोरी की वारदातों का नहीं,बल्कि झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा पर सक्रिय अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क का बड़ा खुलासा साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में पुलिस की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
विज्ञापन

विज्ञापन


