समाचार चक्र संवाददाता
कोटालपोखर।साहेबगंज जिले के कोटाल पोखर प्लस टू उच्च विद्यालय में बच्चों को जमीन पर बैठाकर पढ़ाए जाने की खबर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया।बुधवार को जिला शिक्षा पदाधिकारी नयन कुमार ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर उन्होंने प्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।निरीक्षण के दौरान डीईओ नयन कुमार ने सबसे पहले उस व्यवस्था को देखा,जहां बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर थे।इसके बाद उन्होंने विद्यालय की कक्षाओं,शिक्षकों की उपस्थिति और शैक्षणिक व्यवस्था की विस्तार से जांच की।जब डीईओ ने प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार से पूछा कि विद्यालय में 14 कमरे उपलब्ध होने के बावजूद केवल 8 कमरों में ही पढ़ाई क्यों कराई जा रही है,तो प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार ने शिक्षक की कमी का हवाला दिया।इस पर डीईओ नयन कुमार ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि विद्यालय में 16 नियमित शिक्षक और 2 अतिरिक्त शिक्षक कार्यरत हैं,फिर शिक्षक की कमी का बहाना बनाना पूरी तरह अनुचित है।डीईओ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह प्रधानाध्यापक की गंभीर लापरवाही है,जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।उन्होंने कहा कि पूरे विद्यालय की बारीकी से जांच की गई है और कई खामियां सामने आई हैं। सभी बिंदुओं पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
खबर का असर,बच्चों की आवाज बनी मीडिया-–
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों में डिजिटल और प्रिंट मीडिया ने “प्लस टू उच्च विद्यालय कोटालपोखर में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर” शीर्षक से खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। खबर सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने तत्काल संज्ञान लिया और डीईओ नयन कुमार स्वयं विद्यालय पहुंचकर पूरे मामले की जांच की।

सवाल जो अब भी बाकी हैं…
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यालय में पर्याप्त कमरे और पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध थे,तब आखिर बच्चों को जमीन पर बैठकर पढ़ने की नौबत क्यों आई?यदि मीडिया यह मुद्दा नहीं उठाती,तो क्या यह लापरवाही इसी तरह चलती रहती?यह घटना केवल एक विद्यालय की नहीं,बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और नियमित निगरानी की आवश्यकता की ओर भी गंभीर संकेत देती है।बच्चों को सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा देना केवल व्यवस्था नहीं,बल्कि उनका अधिकार है।

