Homeपाकुड़धर्मेन्द्र सिंह ने सीओ को सौंपा जवाब,कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग
Maqsood Alam
(News Head)

धर्मेन्द्र सिंह ने सीओ को सौंपा जवाब,कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़।दाग संख्या- 1345 स्थित भूमि को लेकर जारी विवाद के बीच भूमि स्वामी धर्मेन्द्र सिंह ने अंचल अधिकारी, पाकुड़ को विस्तृत जवाबी पत्र सौंपते हुए नोटिस पर कई कानूनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा कि जब मामला झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है,तब बार-बार नोटिस जारी करना न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है।धर्मेन्द्र सिंह ने अपने पत्र में कहा कि उन्हें इस भूमि के संबंध में कई बार नोटिस दिए जा चुके हैं और प्रत्येक बार उन्होंने तथ्यों एवं दस्तावेजों के साथ जवाब प्रस्तुत किया है। इसके बावजूद लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।उन्होंने आरोप लगाया कि 6 जुलाई 2026 के नोटिस में पत्रांक या नोटिस संख्या का उल्लेख नहीं है, जिससे इसकी वैधानिकता पर प्रश्न उठता है।साथ ही उन्होंने कहा कि मौजा पाकुड़ में कई तालाबों की प्रकृति समय के साथ बदल चुकी है तथा आसपास के लोगों द्वारा निर्माण भी किए गए हैं।पत्र में धर्मेन्द्र सिंह ने दावा किया है कि उन्होंने संबंधित भूमि वैधानिक तरीके से खरीदी है और उन्होंने किसी भी तालाब की प्रकृति में परिवर्तन नहीं किया। उनका कहना है कि जब उन्होंने भूमि खरीदी थी,उस समय वहां तालाब नहीं बल्कि भूमि थी।उन्होंने यह भी कहा कि अंचल कार्यालय ने जिन हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला दिया है, वे उन पर बाध्यकारी नहीं हैं, क्योंकि वे डब्ल्यूपी (सी) संख्या 726/2015 और 654/2015 के पक्षकार नहीं थे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस भूमि से संबंधित झारखंड हाईकोर्ट के वर्ष 2008 के एक आदेश का अंतिम रूप से निस्तारण हो चुका है और उस आदेश पर भी विचार किया जाना चाहिए।धर्मेन्द्र सिंह ने बताया कि अंचल कार्यालय के पूर्व नोटिस के खिलाफ उन्होंने डब्ल्यूपी (सी) संख्या 1310/2026 दायर की है, जिसमें न्यायालय ने प्रशासन से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। ऐसे में न्यायिक परीक्षण के दौरान नया नोटिस जारी करना उचित नहीं है।पत्र के अंत में उन्होंने अंचल अधिकारी से अनुरोध किया है कि जब तक हाईकोर्ट में लंबित याचिका का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता,तब तक इस प्रकार की नोटिस जारी करने की कार्रवाई रोकी जाए और न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इसके बावजूद कार्रवाई की जाती है तो वे सक्षम न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे।

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