समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार की सेंधमारी कोई नई बात नहीं है, लेकिन पाकुड़ के जिला गव्य विकास विभाग में जो खेल चल रहा है, उसने प्रशासनिक पारदर्शिता और विभागीय साख की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। यहां न तो किसी नियम का खौफ है और न ही अधिकारियों का नियंत्रण। विभाग में किसी पद पर न होते हुए भी ‘नौशाद’ नाम का एक बिचौलिया पूरे गव्य विकास विभाग पर हावी है। योजनाओं का चयन हो या मवेशियों की टैगिंग, सारे मलाईदार और जिम्मेदारी वाले काम बिचौलिया के रहमोकरम पर चल रहे हैं।
वायरल तस्वीर ने खोली पोल, डॉक्टर की जगह बिचौलिया लगा रहा टैग
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हाल ही में कार्यालय परिसर से सामने आई एक तस्वीर ने इस पूरे काले कारनामे की पोल खोलकर रख दी है। तस्वीर में बिचौलिया नौशाद लाभुकों को आवंटित गायों को टैग करते हुए साफ देखा जा सकता है। नियम के मुताबिक, गायों की टैगिंग का संवेदनशील काम पशु चिकित्सक (डॉक्टर) या उनके लिखित निर्देश पर किसी अधिकृत विभागीय कर्मचारी को करना होता है। लेकिन पाकुड़ में यह मशीन और सरकारी टैग बिचौलिये नौशाद के हाथों में सौंप दिए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इसमें विभागीय जिम्मेदार डॉक्टर की लापरवाही हो सकती है। बिना डॉक्टर के इशारे पर सरकारी मशीन और टैग किसी बाहरी व्यक्ति के पास पहुंचना अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े करता है।
लिपिक के कमरे में तय हो रही लाभुकों की किस्मत!
मामला सिर्फ टैगिंग तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री पशुधन योजना के तहत हाल ही में जिले में दो सौ से अधिक गाय पालन की महत्वाकांक्षी योजना आई है, जिसके लिए सैंकड़ों ग्रामीणों ने आवेदन किया है। नियमानुसार इन आवेदनों की जांच और स्क्रूटनी के लिए प्रखंड चयन समिति गठित है। जिसमें प्रमुख (अध्यक्ष), बीडीओ (उपाध्यक्ष), प्रखंड पशुपालन पदाधिकारी (सचिव) के अलावा प्रखंड कल्याण पदाधिकारी, सांसद-विधायक के प्रतिनिधि और जिला परिषद सदस्य शामिल होते हैं। यह समिति जांचती है कि आवेदक पात्र है या नहीं और पिछले तीन सालों में उसने योजना का लाभ लिया है या नहीं। लेकिन पाकुड़ में इस सरकारी प्रक्रिया को पूरी तरह ठेंगा दिखा दिया गया है। सूत्रों का दावा है कि चयन समिति को दरकिनार कर डॉक्टर के माध्यम से आवेदन सीधे लिपिक (क्लर्क) और बिचौलिये नौशाद तक पहुंच रहे हैं। लिपिक के आवास पर बैठकर यह बिचौलिया तय कर रहा है कि किसे गाय मिलेगी और किसका आवेदन रद्दी की टोकरी में जाएगा।
अवैध उगाही और भ्रष्टाचार का बड़ा सिंडिकेट
वर्षों से विभाग में पैठ जमाए बैठा नौशाद कोई समाजसेवा नहीं कर रहा। सूत्रों की मानें तो लाभुकों के चयन से लेकर गाय बांटने तक, हर स्तर पर गरीबों से अवैध वसूली का खेल चल रहा है। जो बिचौलिये की ‘जेब’ गर्म करता है, उसका आवेदन पास हो जाता है, बाकी योग्य गरीब किसान चक्कर काटते रह जाते हैं।
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
यह मामला अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है, लोगों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
क्या कहते हैं पदाधिकारी
जिला पशुपालन पदाधिकारी सह गव्य विकास पदाधिकारी डॉ अनिल सिंह ने कहा कि इस व्यक्ति को पहले ही चेताया गया है, चूंकि ये बाहरी व्यक्ति है, इसलिए सरकारी विभाग में हस्तक्षेप नहीं करें। इस संबंध में बड़ा बाबू को भी खास निर्देश दिया गया है। इसके बावजूद अगर बाज नहीं आते, तो कार्रवाई करेंगे।
क्या कहते हैं डॉ श्यामलाल मरांडी
डॉ श्यामलाल मरांडी ने कहा कि यह काम (टैगिंग) उन्हें (नौशाद) नहीं करना था। मैं अभी बाहर हूं और लौटकर मामले को देखूंगा।

