समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। फाउंडेशन फॉर अवेयरनेस काउंसलिंग एंड एजुकेशन (फेस) के ‘आइडिया’ प्रोजेक्ट के तहत मंगलवार को चापाडांगा स्थित संस्था के प्रशिक्षण केंद्र में पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति के प्रतिनिधियों के लिए एक दिवसीय क्षमता विकास प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यशाला में क्षेत्र की छह विभिन्न पंचायतों से आए 66 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस प्रशिक्षण का मुख्य ध्येय ग्रामीण एवं पंचायत स्तर पर बाल सुरक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करना तथा पीएलसीपीसी सदस्यों को उनके कर्तव्यों व उत्तरदायित्वों के प्रति अधिक सजग और प्रभावकारी बनाना था।
कानूनी प्रावधानों और बाल अधिकारों की दी गई जानकारी
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कार्यशाला के दौरान जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ), कानूनी संरक्षण अधिकारी (एलपीओ) तथा यूनिसेफ के जिला परियोजना समन्वयक ने प्रतिभागियों को बाल अधिकारों व सुरक्षा से जुड़े कई अहम विषयों पर मार्गदर्शन दिया। इसमें मुख्य रूप से जेजे एक्ट (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट) और इसके कानूनी प्रावधान शामिल रहा। पोक्सो एक्ट (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम), बाल विवाह कुप्रथा की प्रभावी रोकथाम, बाल संरक्षण प्रणाली में पीएलसीपीसी की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला गया।
जमीनी समस्याओं और चुनौतियों पर हुआ सीधा संवाद
प्रशिक्षण की सबसे प्रमुख विशेषता यह रहा कि धरातल पर कार्य कर रहे पीएलसीपीसी सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों की व्यावहारिक कठिनाइयों को निर्भीकता से सामने रखा। खुले संवाद सत्र के दौरान बाल विवाह, ड्रॉपआउट बच्चों की शिक्षा, विद्यालयों से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएं तथा बच्चों की सुरक्षा से संबंधित अनेक स्थानीय मुद्दे उभरकर सामने आए। उपस्थित विशेषज्ञों ने इन समस्याओं के त्वरित व स्थायी समाधान खोजने तथा संबंधित सरकारी विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
फेस सचिव रितू पांडेय ने कहा
फेस सचिव रितू पांडेय ने कहा कि बाल अधिकारों के संरक्षण और बच्चों से जुड़ी समस्याओं के समयबद्ध निवारण के लिए पंचायत स्तर की समितियों को सक्षम व सक्रिय बनाना अति आवश्यक है। फेस संस्था इसी दिशा में लगातार संवाद और क्षमता संवर्धन के कार्यक्रमों को आगे बढ़ा रही है। आश्वस्त किया कि प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त हुए महत्वपूर्ण सुझावों और मैदानी फीडबैक को आगामी रणनीतिक कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा। पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण के ताने-बाने को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से भविष्य में भी ऐसे संवाद, बैठकें और क्षमता विकास कार्यशालाएं निरंतर आयोजित की जाती रहेंगी।
विभिन्न विभागों व जनप्रतिनिधियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में ‘आइडिया’ परियोजना की प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर निकिता झा, एमआईएस कोऑर्डिनेटर देवज्योति बनर्जी, आईआरपी मेहेबूब आलम, शहादत हुसैन, रबिकुल इस्लाम के अलावा टीम से शमीमा, अशरफ, हफीजा एवं रिजवाना की सक्रिय भूमिका रही। इसके साथ ही विभिन्न गांवों के मुखिया, स्वास्थ्य सहिया, शिक्षक एवं अग्रिम पंक्ति के समुदाय प्रतिनिधियों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।

