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Maqsood Alam
(News Head)

खनिज संपदा से करोड़ों का राजस्व, फिर भी अवैध खनन पर शिकंजा कसने की चुनौती

टास्क फोर्स की बैठक में खुली कई परतें: 2650 करोड़ के लक्ष्य के बीच 1332 करोड़ की प्राप्ति, बालू घाटों की प्रक्रिया लंबित,कोयला परिवहन और सड़कों पर भी सवाल

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़।जिले की पहचान जहां एक ओर खनिज संपदा और बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियों से जुड़ी है, वहीं दूसरी ओर अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर नियंत्रण प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। मंगलवार को उपायुक्त मेघा भारद्वाज की अध्यक्षता में हुई जिला खनन टास्क फोर्स की बैठक में प्रशासन ने एक बार फिर अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्ती का संदेश दिया। बैठक में दिए गए निर्देशों और सामने आए आंकड़े बताते हैं कि खनन क्षेत्र में निगरानी के साथ-साथ राजस्व, परिवहन, सड़क, बालू घाट और पर्यावरणीय मानकों से जुड़े कई मोर्चों पर एक साथ काम करने की जरूरत है।

2650 करोड़ के लक्ष्य के सामने 1332 करोड़ की प्राप्ति—

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बैठक में जिला खनन पदाधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने 2650 करोड़ 42 लाख रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है। 28 सितंबर तक 1332 करोड़ 66 लाख रुपये की राजस्व प्राप्ति हो चुकी है।अर्थात निर्धारित वार्षिक लक्ष्य का लगभग 50.28 प्रतिशत राजस्व छह महीने के आसपास की अवधि में प्राप्त हुआ है। अब वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में लक्ष्य का लगभग आधा हिस्सा हासिल करना बाकी है। ऐसे में अवैध खनन एवं परिवहन पर नियंत्रण के साथ वैध खनन गतिविधियों की नियमित निगरानी राजस्व हित के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

एक ही जिले में खनन और खराब सड़क का विरोधाभास—

बैठक में अमड़ापाड़ा क्षेत्र की खराब सड़कों का मुद्दा भी सामने आया। उपायुक्त ने डीबीएल और बीजीआर को सड़कों को दुरुस्त करने का निर्देश दिया।यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खनिजों का परिवहन होता है,वहां भारी वाहनों की आवाजाही का सीधा असर सड़क संरचना पर पड़ता है। ऐसे में सड़क की स्थिति, खनिज परिवहन की मात्रा, वाहनों की क्षमता और निर्धारित मार्गों की निगरानी को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।जांच का बड़ा सवाल यह है कि खनिज परिवहन से जुड़े क्षेत्रों में सड़क क्षति का आकलन,जिम्मेदारी तय करने और मरम्मत की निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

बालू घाटों की प्रक्रिया में भी तस्वीर पूरी साफ नहीं–

बैठक में कैटेगरी-2 बालू घाटों की भी समीक्षा हुई। चार घाटों के लिए ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी दी गई, जबकि महेशपुर प्रखंड के तीन अन्य कैटेगरी-2 बालू घाटों की ग्राम सभा लंबित बताई गई।प्रशासन ने लंबित प्रक्रिया जल्द पूरी कराने का निर्देश दिया है। इसका सीधा संबंध वैध बालू आपूर्ति और अवैध बालू कारोबार पर नियंत्रण से है। यदि वैध घाटों की प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो प्रशासन के पास खनिज परिवहन की निगरानी के लिए अधिक स्पष्ट व्यवस्था उपलब्ध होती है।

चालान और वाहनों की जांच पर विशेष जोर—

खनिज परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों और चालानों की नियमित एवं सघन जांच के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अवैध खनन की सूचना मिलने पर तत्काल वरीय अधिकारियों को सूचना देकर कार्रवाई का निर्देश भी दिया गया है।यहां निगरानी की असली परीक्षा कागज और जमीन के बीच तालमेल की है। वाहन पर लदा खनिज, चालान में दर्ज मात्रा, स्रोत, गंतव्य और परिवहन की अनुमति-इन सभी बिंदुओं का मिलान नियमित रूप से किया जाना जरूरी है।

कोयला परिवहन पर भी प्रशासन की नजर—

बैठक में कोयला चोरी रोकने तथा परिवहन के दौरान सभी वाहनों को अनिवार्य रूप से तिरपाल से ढकने का निर्देश दिया गया। नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की बात कही गई।इस निर्देश के बाद जांच एजेंसियों के सामने चुनौती सिर्फ वाहन पकड़ने की नहीं, बल्कि खनिज के स्रोत, वैध दस्तावेज, परिवहन मार्ग और गंतव्य तक पूरी ट्रैकिंग सुनिश्चित करने की भी है।

एनजीटी के निर्देशों पर 15 अक्टूबर की समयसीमा—

बैठक में राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी के निर्देशों के अनुपालन पर विशेष जोर दिया गया। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को 15 अक्टूबर तक निर्धारित सभी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है।
अब प्रशासन के लिए यह समयसीमा महत्वपूर्ण हो गई है। अगले कुछ दिनों में यह देखना अहम होगा कि एनजीटी से संबंधित कौन-कौन से मानक लंबित हैं, किस विभाग को क्या जिम्मेदारी दी गई है और 15 अक्टूबर तक अनुपालन की वास्तविक स्थिति क्या रहती है।

शिकायत पोर्टल भी प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा—

बैठक में सीपीग्राम और पीजी पोर्टल से प्राप्त शिकायतों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने शिकायतों के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन का निर्देश दिया।
खनन से जुड़े मामलों में शिकायतों की प्रकृति, कार्रवाई की स्थिति और शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता भी प्रशासनिक निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सिर्फ शिकायत बंद करना और शिकायत का समाधान करना—दोनों की वास्तविकता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए शिकायतों पर हुई कार्रवाई का फील्ड सत्यापन भी प्रभावी निगरानी का हिस्सा बन सकता है।

अब सवाल सिर्फ निर्देशों का नहीं, अमल का है—

जिला खनन टास्क फोर्स की बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट रूप से अवैध खनन, अवैध परिवहन और अवैध भंडारण के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का निर्देश दिया है। लेकिन असली तस्वीर अब फील्ड में होने वाली जांच और कार्रवाई से सामने आएगी।

:–क्या सभी खनन क्षेत्रों में नियमित जांच हो रही है

:–क्या खनिज लदे प्रत्येक वाहन के दस्तावेज और चालान की प्रभावी जांच हो रही है

:–क्या अवैध भंडारण की सूचना पर तत्काल कार्रवाई होती है?

:–क्या कोयला परिवहन में तिरपाल संबंधी निर्देश का पालन हो रहा है?

:–क्या बालू घाटों की लंबित ग्रामसभा प्रक्रिया समय पर पूरी होगी?

:–क्या एनजीटी के सभी मानकों का 15 अक्टूबर तक अनुपालन हो पाएगा?

:–और सबसे अहम-अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई के बाद उसकी निरंतर निगरानी कौन करेगा?

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