समाचार चक्र संवाददाता
कोटालपोखर– शिक्षक केवल किताबी ज्ञान नहीं देते, बल्कि समाज की भावी पीढ़ी का निर्माण कर राष्ट्र के भविष्य को दिशा प्रदान करते हैं। उनके द्वारा जलाया गया शिक्षा का दीपक पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को ज्ञान, संस्कार और जागरूकता की रोशनी से आलोकित करता है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए कोटालपोखर थाना रोड स्थित श्री श्री दुर्गा पूजा समिति ने क्षेत्र के सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।समिति की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में लगभग एक दर्जन सेवानिवृत्त शिक्षकों को मंच पर आमंत्रित कर मोमेंटो प्रदान किया गया। इस दौरान क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाने, विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने तथा अपने सेवाकाल में शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट किया गया। समारोह का माहौल उस समय भावुक और गौरवपूर्ण हो गया, जब समिति के पदाधिकारियों ने शिक्षकों को मोमेंटो भेंट करने के साथ-साथ उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
शिक्षक समाज के वास्तविक निर्माता, उनका योगदान अमूल्य—
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सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षकों का योगदान समाज की स्मृतियों में जीवित रहता है। उनके मार्गदर्शन में शिक्षित हुए विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं। ऐसे में इन शिक्षकों का सम्मान केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस तपस्या, समर्पण और सेवा के प्रति आभार है, जिसने कोटालपोखर क्षेत्र में शिक्षा की नींव को मजबूत करने में भूमिका निभाई।श्री श्री दुर्गा पूजा समिति की इस पहल ने यह संदेश दिया कि समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यक्तित्वों को सम्मान देना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। शिक्षकों के प्रति आदर और उनके अनुभवों से प्रेरणा लेने की परंपरा आने वाली पीढ़ियों को भी शिक्षा एवं संस्कार के महत्व से परिचित कराती है।
इन शिक्षकों को किया गया सम्मानित
सम्मान समारोह में राजकुमार साह, प्रशांत गुप्ता, मोहम्मद शमीम, सच्चिदानंद भगत, मोहम्मद अनीस, पारस प्रसाद साह, विनय भगत, विनय कुमार साह एवं अनिल कुमार भगत को मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सम्मान से बढ़ता है समाज का गौरव
कोटालपोखर के इन सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मान क्षेत्र की उस समृद्ध परंपरा का प्रतीक है, जिसमें ज्ञान देने वालों को सर्वोच्च आदर दिया जाता है। श्री श्री दुर्गा पूजा समिति ने अपने इस प्रयास से स्पष्ट किया कि शिक्षकों का सम्मान केवल उनके सेवाकाल तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके जीवनभर के योगदान को समाज में उचित स्थान मिलना चाहिए।निस्संदेह, कोटालपोखर के ये शिक्षक शिक्षा जगत के ऐसे कर्णधार हैं, जिनके योगदान को समय की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। उनका सम्मान करना दरअसल उस ज्ञान,संस्कार और समर्पण का सम्मान है, जिसके आधार पर समाज की मजबूत नींव खड़ी होती है।
