समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़।किसी विद्यार्थी की सफलता सिर्फ उसके परिवार के लिए गर्व का क्षण नहीं होती,बल्कि वह पूरे समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए उम्मीद की किरण होती है।इसी सोच के साथ झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ, जिला इकाई पाकुड़ की ओर से प्रतिभा सम्मान समारोह सह शैक्षिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।समारोह में जिले की मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा में टॉप-10 में स्थान बनाने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षा के क्षेत्र में लंबी सेवा देने वाले सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
दीप प्रज्वलन से शुरुआत,डॉ. राधाकृष्णन को किया नमन—
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद उपस्थित शिक्षकों ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।समारोह में प्रतिभाओं का सम्मान करते हुए विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया गया। वहीं सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मान देकर उनके वर्षों के योगदान और अनुभव को नमन किया गया।
डीईओ बोलीं-शिक्षक समाज के भविष्य के निर्माता—
जिला शिक्षा पदाधिकारी अनीता पूर्ति ने कहा कि छात्रों और समाज के भविष्य को बेहतर बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल पाठ्यक्रम पूरा करना पर्याप्त नहीं,बल्कि पूरी शिक्षा प्रणाली के विकास पर लगातार काम करने की जरूरत है।उन्होंने शिक्षा से जुड़े मुद्दों के समाधान और शिक्षकों की समस्याओं को सामने लाने की दिशा में संघ के प्रयासों की भी सराहना की।
सम्मान से बढ़ेगा विद्यार्थियों का मनोबल—
संघ के जिलाध्यक्ष आंद्रियास हेंब्रम ने कहा कि प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करने का उद्देश्य उनका मनोबल बढ़ाना है, ताकि वे आगे और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों। उन्होंने कहा कि संघ केवल शिक्षकों से जुड़े विषयों तक सीमित नहीं है,बल्कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने और शैक्षिक सुधारों पर सार्थक चर्चा के लिए भी प्रयासरत है।
संगोष्ठी में सिर्फ सम्मान नहीं,शिक्षा के भविष्य पर भी चर्चा—
कार्यक्रम की खासियत यह रही कि सम्मान समारोह के साथ शैक्षिक संगोष्ठी में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई। भाषा, साहित्य और शिक्षा प्रणाली के विकास को लेकर शिक्षकों ने अपने विचार रखे। सेवानिवृत्त शिक्षकों ने अपने लंबे अनुभव साझा करते हुए वर्तमान शिक्षा व्यवस्था के लिए उपयोगी सुझाव भी दिए।
एक मंच पर तीन पीढ़ियां-मेधा,अनुभव और भविष्य–
समारोह का सबसे खास संदेश यही रहा कि एक ओर जहां नई पीढ़ी की प्रतिभा को सम्मान मिला,वहीं दूसरी ओर शिक्षा की नींव मजबूत करने वाले सेवानिवृत्त शिक्षकों के अनुभव को मंच मिला। यानी कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उपलब्धि, शिक्षकों का समर्पण और शिक्षा के भविष्य—तीनों को एक साथ सम्मान दिया गया।मौके पर एलन मरीना हेंब्रम, विजय कुमार भंडारी,विनय कुमार भगत, जॉन मुर्मू,नमिता त्रिवेदी,निवास प्रसाद, ज्योति पांडे,शतरूपा मुखर्जी समेत बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

