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Maqsood Alam
(News Head)

मुश्किल हालात में भी नहीं मानी हार,सफाई कर्मी से वार्ड पार्षद तक संघर्ष भरा रहा मिथुन मरांडी का सफर

मकसूद आलम@समाचार चक्र

पाकुड़। आदिवासी परिवार में जन्म लेने वाले मिथुन मरांडी गरीबी और मुश्किल हालात में भी हार नहीं माना। कई बार ऐसी परिस्थितियां भी आई, जब खुद को अकेला महसूस किया। तब ठीक से चलना भी नहीं सीखा होगा, जब पिता दुनिया से विदा हो गए। कुछ साल बाद मां की ममता भी छीन गई, जब मिथुन जवानी की दहलीज भी नहीं देखा होगा। ऐसे और भी लड़के होंगे, जिनकी जिंदगी संघर्ष से भरी होती हैं‌। उसी में एक नाम मिठून मरांडी का है। मिठून मरांडी के जन्म के बाद ही पिता साहेब मरांडी का निधन हो गया था। मिठून अपने पिता को सही से देख नहीं पाया था। वहीं मां ठकरान मुर्मू मजदूरी कर मिठून के साथ-साथ और दो पुत्र का किसी तरह परवरिश कर बड़ा किया। लेकिन कुदरत को तो कुछ और मंजूर था। मिठून जब 18 साल का हुआ तो मां का साया भी सर से उठ गया। अब मिठून मरांडी और उनके दो बड़े भाई चुन्नू मरांडी और प्रदीप मरांडी पेट की आग बुझाने के लिए बाहर चले गए। मिठून अकेले अपने घर धनुषपूजा में रह गए। उसी दौरान मिठून के सर पर हाथ रखते हुए अफजल हुसैन जो रिश्ते में फूफा हैं ने कहा कि चिंता की कोई जरूरत नहीं हैं। आज से तुम मेरे बेटे की तरह रहोगे। अफजल हुसैन जो उस दौरान कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष के रूप में थे। मिठून को दसवीं कक्षा तक पढ़ाई कराने के बाद कांग्रेस के पार्टी कार्यालय कर्मी के रूप में रख लिया। मिठून कांग्रेस कार्यालय में सफाई के साथ-साथ जितने भी फरियादी और कांग्रेस कार्यकर्ता आते थे, उन्हें सम्मान के साथ बैठाते और चाय आदि पिलाते थे। मिठून को यह नहीं पता था उसकी भी बहुत जल्द किस्मत बदलने वाली हैं। अफजल हुसैन शारीरिक रूप से कमजोर हो चले थे। इसलिए उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से किनारा होना पड़ा।लेकिन मिठून अपने काम को ईमानदारी पूर्वक करता रहा। हाल में जब नगर पालिका चुनाव की घोषणा हुई तो अफजल हुसैन ने मिठून को वार्ड संख्या एक से चुनाव में पार्षद के पद पर खड़ा कर दिया। चुनाव हुए और मिठून मरांडी ने अपने प्रतिद्वंदी रतन सरदार को 138 वोट से पराजित कर दिया। मिठून ने कहा मैंने माता और पिता को बचपन में खोते देखा है। जब मैं अनाथ हो गया तो मौसा अफजल हुसैन और मौसी पुतुल हेंब्रम मेरा सहारा बने। किसी तरह दसवीं तक की पढ़ाई की। इसलिए मैं किसी बच्चे को बाप के बिना नहीं छोडूंगा। मैं वार्ड को ऐसा बनाऊंगा कि हर मां को सहारा मिले। जनता ने उसकी मेहनत, मां के त्याग और पिता की याद देखी।वर्तमान में मिठून पार्षद कार्यालय में बैठने के बाद प्रतिदिन जिला कांग्रेस कार्यालय की साफ-सफाई करता हैं। वे कहता हैं मैं जो भी हूं मेरी सफलता यहीं से शुरू हुई हैं। इसके बाद मौसा और मौसी को फोन करता है और कहता है, आप ने मुझे पाला है। माता-पिता का साया नहीं था, लेकिन आपका प्यार और आशीर्वाद हैं। मिठू कहता हैं संघर्ष जीवन का हिस्सा हैं, जो इसे अपना दोस्त बना लेता हैं, वहीं असली मर्द बनता हैं। हार कभी मत मानना, क्यूंकि अंधेरा जितना गहरा होगा, सुबह उतनी ही खूबसूरत हो.

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