मकसूद आलम
पाकुड़-झारखंड का सीमावर्ती जिला पाकुड़ सिर्फ पत्थर और कोयले के लिए ही नहीं,बल्कि अपनी उपजाऊ धरती पर लहलहाते जूट (पटसन) के लिए भी जाना जाता है।कभी यही जूट हजारों किसानों की आजीविका का मजबूत सहारा था।लेकिन आज वही किसान लागत, बाजार,सरकारी खरीद और प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में गहरे संकट से जूझ रहे हैं।इन्हीं किसानों की आवाज को देश के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाने का प्रयास करते हुए भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव डॉ. मिसफिका हसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्तृत ज्ञापन भेजा है। इसकी प्रतिलिपि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री और केंद्रीय वस्त्र मंत्री को भी भेजी गई है।
जूट सिर्फ फसल नहीं, लाखों परिवारों की जिंदगी—
डॉ. मिस्फीका हसन ने अपने पत्र में कहा है कि पाकुड़ और संथाल परगना का सीमावर्ती इलाका देश के प्रमुख जूट उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। यहां हजारों किसान परिवार पीढ़ियों से जूट की खेती करते आ रहे हैं। यही खेती उनके बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और परिवार की आर्थिक रीढ़ बनी हुई है।उन्होंने लिखा कि आज पूरी दुनिया प्लास्टिक के विकल्प तलाश रही है और पर्यावरण अनुकूल जूट की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद विडंबना यह है कि जूट उगाने वाले किसान अपनी मेहनत का उचित मूल्य नहीं पा रहे हैं।
बाजार में शोषण, एमएसपी का लाभ नहीं—
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। सरकारी खरीद केंद्रों की कमी,बिचौलियों का दबदबा,प्रसंस्करण इकाइयों का अभाव और वित्तीय सहायता की कमी ने किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया है।स्थिति यह हो गई है कि कई किसान जूट की खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।यदि यही हाल रहा तो पाकुड़ की वर्षों पुरानी जूट परंपरा गंभीर संकट में पड़ सकती है।
प्रधानमंत्री से रखीं 10 बड़ी मांगें:–
डॉ.मिस्फीका हसन ने केंद्र सरकार से मांग की है कि—
:–पाकुड़ को विशेष जूट उत्पादक जिला घोषित किया जाए।
:–जूट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के स्थायी खरीद केंद्र खोले जाएं।
:–आधुनिक जूट प्रसंस्करण,ग्रेडिंग,रेटिंग और भंडारण केंद्र स्थापित किए जाएं।
:–किसानों को उन्नत बीज,आधुनिक कृषि उपकरण और वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए।
:–जूट आधारित उद्योगों और स्टार्टअप को विशेष प्रोत्साहन मिले।
:–पाकुड़ में जूट इंडस्ट्रियल क्लस्टर स्थापित किया जाए।
:–प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए राहत कोष और प्रभावी फसल बीमा लागू किया जाए।
:–किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता मिले।
:–जूट अनुसंधान एवं विकास केंद्र स्थापित किया जाए।
:–जूट उत्पादों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विपणन के लिए विशेष योजना लागू की जाए।
रोजगार और पलायन पर भी असर:–
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि पाकुड़ में जूट उद्योग विकसित होता है तो केवल किसानों की आय ही नहीं बढ़ेगी,बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, ग्रामीण पलायन रुकेगा और पूर्वी भारत में जूट आधारित औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिस्फीका हसन कि अपील:–
डॉ.मिस्फीका हसन ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि पाकुड़ और संथाल परगना के जूट किसानों के हित में विशेष केंद्रीय पैकेज की घोषणा कर शीघ्र कार्रवाई की जाए।उनका कहना है कि यह केवल एक फसल का सवाल नहीं,बल्कि हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका,सम्मान और भविष्य का प्रश्न है।जब पूरी दुनिया पर्यावरण बचाने के लिए जूट को अपना रही है, तब जूट उगाने वाला किसान अपने ही खेत में असुरक्षित महसूस कर रहा है।यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए,तो पाकुड़ की पहचान माने जाने वाले इस सुनहरे रेशे की चमक फीकी पड़ सकती है।

