ललन झा@समाचार चक्र
अमड़ापाड़ा। रामनवमी या राम जन्मोत्सव भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह हिंदुओं का एक महान पर्व है। यह पर्व भगवान राम के जन्म की खुशी में मनाई जाती है। भगवान राम विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। रामनवमी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के नवमी तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व छह अप्रैल को मनाया जाना है। इस दिन लोग भगवान राम और उनके अनन्य भक्त हनुमान की विशेष पूजा करते हैं। मंदिरों को सजाते हैं। भगवान राम और हनुमान के जयकारे से माहौल भक्तिमय हो जाता है। लोग भजन गाते हैं और रामायण का पाठ करते हैं। इस दिन भक्त अपने घरों में महावीर का ध्वजा अथवा हनुमान की पताका का आरोहण करते हैं। हनुमान राम के अतुलनीय भक्त हैं इसलिए , इस दिन हनुमान की पूजा-उपासना से भगवान राम प्रसन्न होते हैं। भक्तों को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
रामनवमी हमें भगवान राम के जीवन के हर पहलू का सम्मान करना सिखाती है
हमें सर्वप्रथम यह जानना चाहिए कि रामनवमी धर्म के शाश्वत सिद्धान्तों : बुराई पर अच्छाई की जीत की याद दिलाती है। भगवान राम का जीवन कर्तव्य, सम्मान और बलिदान के आदर्शों का उदाहरण है जो हमें अपने नैतिक मूल्यों को बनाए रखने की सीख देती है। साथ- साथ हम सबों को धार्मिक जीवन जीने को प्रेरित करता है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने राम चन्द्र के प्रिय अवतार के रूप में सुशासन, वीरता, त्याग, विनम्रता और नैतिकता की स्थापना के लिए मनुष्य रूप में विभिन्न लीलाएं कीं और मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। रामनवमी भगवान राम के मानव और दिव्य दोनों रूपों में प्रकट होने का प्रतीक है । संपूर्ण भारत में विशेषकर पवित्र शहर अयोध्या में जो भगवान राम का जन्म स्थान है वहां रामनवमी गहन श्रद्धा और आस्था के रूप में मनाई जाती है। हिंदु चैत्र नवरात्रि के दौरान नौ दिनों का उपवास रखते हैं। सात्विक जीवन जीते हैं। शाकाहारी भोजन करते हैं। नशा आदि से परहेज करते हैं। शरीर को शुद्ध कर पूजा और उपासना करते हैं। इस प्रकार रामनवमी हमें राम का अनुशरण करने, धर्म के अनुसार आचरण करने, अनीति और अन्याय के विरुद्ध लड़ने, नैतिक सिद्धांतों का पालन करने, अनुशासित और संयमित जीवन जीने के साथ -साथ मानवता के रक्षार्थ त्याग और बलिदान का संदेश देती है।