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अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। जिले में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जांच का दायरा बढ़ाने के साथ ही एड्स संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय स्क्रीनिंग के कारण नए मामलों का पता चलने की दर बढ़ी है। जिले में एचआईवी पॉजिटिव के बढ़ते मामले कहीं ना कहीं चिंता का विषय बनता जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में विभाग सालाना 60 एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के लक्ष्य को लेकर काम कर रही है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महज चार महीने में ही यह लक्ष्य पूरा होता दिख रहा है। अप्रैल महीने से 10 जुलाई तक में ही 52 एचआईवी पॉजिटिव मरीज पाए गए हैं। यह आंकड़ा पूरे जिले का है। आंकड़ों से साफ पता चलता है कि एड्स जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारी की क्या स्थिति है। वहीं पाकुड़िया और महेशपुर में सबसे ज्यादा एड्स के मरीजों के मिलने की बातें भी सामने आ रही है। हालांकि इन प्रखंडों में जांच भी ज्यादा हो रहे है। आंकड़ों पर गौर करें तो पाकुड़ जिले में एचआईवी की स्क्रीनिंग और जांच में लगातार नए मामले सामने आ रहे हैं। यह भी बताया जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं की अनिवार्य स्क्रीनिंग के दौरान पाकुड़ में काफी संख्या में मामले सामने आए हैं। जो कि स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। अगर जांच के दायरों की बात करें तो स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में जांच अभियान तेज होने से छिपे हुए मरीजों की पहचान हो रही है। जिसके परिणाम स्वरूप आधिकारिक आंकड़ों का ग्राफ बढ़ रहा है।
अठारह सालों में 700 से ज्यादा मिले मरीज
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सदर अस्पताल में साल 2008 में एड्स के मरीजों की खोज के लिए जांच की प्रक्रिया शुरू हुई थी। आईसीटीसी सेंटर की स्थापना के बाद अब तक कुल 700 से भी ज्यादा एड्स के मरीज मिल चुके हैं। इनमें गर्भवती महिलाएं, युवा और मजदूर वर्ग के लोग शामिल हैं।
प्रमुख कारण और खतरे
जांच में हो रही वृद्धि के साथ-साथ यह स्पष्ट हो रहा है कि जिले में संक्रमण की जड़ें गहरी हैं। इसके पीछे बड़ी वजह जागरूकता की कमी मानी जा रही है।ग्रामीण इलाकों में असुरक्षित यौन संबंध और इस बीमारी से जुड़े लक्षणों एवं बचाव की जानकारी का अभाव इसके मुख्य कारणों में से एक है। असुरक्षित रक्त आधान और संक्रमित सुइयों के इस्तेमाल जैसे कारक भी ग्रामीण इलाकों में एचआईवी के प्रसार के जोखिम को बढ़ाते हैं।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की पहल
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठा रहा है। माइक्रो प्लान के तहत काम हो रहा है। घर-घर जाकर जांच प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। सदर अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त एचआईवी जांच (आईसीटीसी) की सुविधा उपलब्ध है।
एआरटी केंद्र में चल रहा इलाज
मरीजों के इलाज के लिए दुमका स्थित एआरटी सेंटर से पाकुड़ के मरीजों को जोड़ा गया है। जहां जीवन रक्षक दवाइयां एवं परामर्श मुफ्त दिए जाते हैं। हालांकि साहिबगंज और मालदा में भी एड्स के मरीजों को इलाज के लिए भेजा जाता है।
जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन
विश्व एड्स दिवस जैसे मौकों पर स्कूल, कॉलेज और अस्पतालों में मानव श्रृंखला व रैलियों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

