समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़।केंद्र सरकार द्वारा (माइंस एंड मिनरल्स डेवलोपमेन्ट एंड रेगुलेशन) अमेण्डमेंट बिल, 2026 एमएमडीआर संसोधन विधेयक) को संसद के दोनों सदनों से पारित कराए जाने के बाद झारखंड की राजनीति में खनिज अधिकार और राज्य के राजस्व को लेकर बहस तेज हो गई है।इसी मुद्दे को लेकर लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने रविवार को प्रेसवार्ता कर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए और बड़े आंदोलन के संकेत दिए हैं।विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि आगामी 20 अगस्त को सेंट्रल कोर कमिटी की बैठक होगी। इस बैठक में पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि बैठक के बाद झारखंड में व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यह आंदोलन अस्सी के दशक में हुए झारखंड आंदोलन से भी बड़ा रूप ले सकता है।उनके मुताबिक झारखंड के खनिज और प्राकृतिक संसाधनों के अधिकार का सवाल केवल राजनीति का विषय नहीं, बल्कि राज्य के अस्तित्व, आर्थिक हित और अधिकारों से जुड़ा मामला है।
झारखंड का कोयला रोक देंगे तो दिल्ली भी अंधेरे में होगी—
प्रेसवार्ता के दौरान हेमलाल मुर्मू ने कहा कि आंदोलन की स्थिति ऐसी होगी कि “झारखंड का कोयला रोक कर दिल्ली को भी अंधेरे में डाल देंगे।” उनके इस बयान के बाद खनिज कानून का मुद्दा और अधिक राजनीतिक रूप से गरमा गया है।विधायक ने कहा कि झारखंड देश के औद्योगिक विकास में अपने खनिज संसाधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान देता है। ऐसे में राज्य के खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व अधिकारों को सीमित करने वाला कोई भी कदम झारखंड के हितों पर सीधा असर डाल सकता है।
12 और 13 अगस्त को संसद में क्या हुआ—
MMDR Amendment Bill, 2026 को 12 अगस्त को लोकसभा और 13 अगस्त को राज्यसभा ने पारित किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार लोकसभा में विधेयक बहुत कम समय में विपक्ष के विरोध के बीच पारित हुआ और राज्यसभा ने अगले दिन इसे मंजूरी दी।हेमलाल मुर्मू ने आरोप लगाया कि दोनों सदनों में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर पर्याप्त बहस नहीं कराई गई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और झारखंड के हितों के लिए गंभीर विषय बताया।
आखिर एमएमडीआर संशोधन में ऐसा क्या है–
इस संशोधन का प्रमुख विवाद राज्य सरकारों की खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर टैक्स, सेस अथवा अन्य लेवी लगाने की शक्ति से जुड़ा है।विधेयक में प्रस्तावित नए प्रावधान के तहत राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर टैक्स, सेस या अन्य लेवी अपनी मर्जी से नहीं लगा सकेंगी, बल्कि केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों और सीमाओं के अधीन ही ऐसा किया जा सकेगा।केंद्र सरकार का तर्क है कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रकार के टैक्स और लेवी से खनन क्षेत्र पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है, लागत बढ़ती है और पूरे देश में खनिज व्यवस्था में असमानता पैदा होती है।लेकिन झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्य इसे राज्य के वित्तीय अधिकार और संघीय ढांचे से जोड़कर देख रहे हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस कानून पर आपत्ति जता चुके हैं और केंद्र से पुनर्विचार की मांग कर चुके हैं।
अब 20 अगस्त पर टिकी निगाहें—
हेमलाल मुर्मू के बयान के बाद अब सबकी नजर 20 अगस्त की सेंट्रल कोर कमिटी की बैठक पर टिक गई है। इस बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तय होने की बात कही जा रही है।सवाल यह है कि क्या खनिज अधिकारों का यह मुद्दा आने वाले दिनों में झारखंड में एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेगा?क्या कोयला,लौह अयस्क,पत्थर और अन्य खनिजों से जुड़े राज्य के आर्थिक हितों को लेकर झारखंड एक बार फिर केंद्र के खिलाफ बड़े आंदोलन की राह पर जाएगा?20 अगस्त की बैठक के बाद इन सवालों का जवाब सामने आने की उम्मीद है।फिलहाल इतना तय है कि MMDR संशोधन विधेयक 2026 ने झारखंड की राजनीति में खनिज अधिकार,राजस्व और केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर एक नया अध्याय खोल दिया है।प्रेसवार्ता में जिला अध्यक्ष अजीजुल इस्लाम मौजूद थे.
