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मकसूद आलम
पाकुड़। जिले को नया उप विकास आयुक्त (डीडीसी) मिलने के साथ ही जिले में खुशी और उम्मीद का माहौल बन गया है। प्रशासनिक कार्यशैली, सरल स्वभाव और युवाओं के बीच खास पहचान रखने वाले अरविंद लाल को पाकुड़ का नया डीडीसी बनाए जाने की खबर मिलते ही आम लोगों, बुद्धिजीवियों और युवाओं में उत्साह देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि अरविंद लाल सोमवार शाम पाकुड़ पहुंचेंगे। उनके स्वागत को लेकर कई सामाजिक संगठनों एवं युवाओं में खास उत्सुकता देखी जा रही है।
पहले भी पाकुड़ से रहा गहरा नाता
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अरविंद लाल इससे पहले पाकुड़ में एसडीओ के पद पर अपनी सेवा दे चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दी थी। यही कारण है कि आज भी जिले के लोग उन्हें एक संवेदनशील और जनप्रिय अधिकारी के रूप में याद करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनना, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर जोर देना उनकी पहचान रही है। आम लोगों से सीधे संवाद करने की उनकी शैली ने उन्हें जनता के बेहद करीब ला दिया था।
“एक पहल” से युवाओं में जगाई थी शिक्षा की अलख
अरविंद लाल सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं,बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणास्रोत भी रहे हैं। उन्होंने युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करने हेतु “एक पहल” नाम से निःशुल्क कोचिंग सेंटर की शुरुआत की थी। इस पहल के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मुफ्त मार्गदर्शन और शिक्षा उपलब्ध कराई गई। कई युवाओं ने उनकी प्रेरणा से प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। यही वजह है कि आज भी जिले के हजारों छात्र और युवा उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं।
युवाओं में आज भी अलग क्रेज
पाकुड़ के युवाओं के बीच अरविन्द लाल का अलग ही प्रभाव देखने को मिलता है। सोशल मीडिया से लेकर चौक-चौराहों तक उनके डीडीसी बनने की चर्चा हो रही है। कई युवाओं का कहना है कि अब जिले में विकास और शिक्षा दोनों को नई दिशा मिलेगी।
“एक पहल” कोचिंग सेंटर में डीसी से लेकर वरीय अधिकारी तक निःशुल्क शिक्षा दे चुके हैं
जिस वक्त अरविंद लाल बतौर एसडीओ के रूप में पदस्थापित थे, उस दौरान तत्कालीन डीसी ए मुथू कुमार,तत्कालीन एसपी अजय लिंडा, तत्कालीन डीएफओ रजनीश कुमार भी निः शुल्क शिक्षा देने के लिए आते थे। उस दौरान पुराना जिला परिषद कार्यालय में बच्चों को निः शुल्क शिक्षा देने का काम करते थे। आमलोगों की माने तो ऐसे अधिकारी बहुत ही कम होते हैं।बहरहाल एक बार पुनः युवाओं में उम्मीद जगी हैं.

