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Maqsood Alam
(News Head)

जमीन पर बैठकर परीक्षा देने को मजबूर भविष्य! कोटाल पोखर प्लस टू उच्च विद्यालय की तस्वीर ने शिक्षा व्यवस्था पर खड़े किए बड़े सवाल

Gunjan Saha
(Desk Head)

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समाचार चक्र संवाददाता

कोटाल पोखर।कहा जाता है कि बच्चे देश का भविष्य हैं। लेकिन जब यही भविष्य जमीन पर बैठकर परीक्षा देने को मजबूर हो,तो यह केवल एक विद्यालय की समस्या नहीं,बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल है।झारखंड सरकार शिक्षा में सुधार और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के लाख दावे करती है,लेकिन साहेबगंज जिले के कोटाल पोखर प्लस टू उच्च विद्यालय की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। यहां डेस्क-बेंच की भारी कमी के कारण छात्र-छात्राएं जमीन पर बैठकर परीक्षा देने को विवश हैं। यह दृश्य केवल असुविधा का नहीं,बल्कि सरकारी व्यवस्था की संवेदनहीनता का प्रतीक बन गया है।विद्यालय में 1100 से अधिक छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं,लेकिन बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच तक उपलब्ध नहीं हैं।

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इतना ही नहीं,कई कमरों में प्रकाश की भी समुचित व्यवस्था नहीं है।ऐसे माहौल में छात्र किस मन से पढ़ाई करें और कैसे बेहतर भविष्य का सपना देखें,यह सबसे बड़ा प्रश्न बन गया है।सबसे चिंताजनक बात यह है कि शिक्षा विभाग हर वर्ष विद्यालयों के विकास और आधारभूत सुविधाओं के लिए विभिन्न मदों से राशि उपलब्ध कराने का दावा करता है।इसके बावजूद यदि छात्र जमीन पर बैठकर परीक्षा देने को मजबूर हैं,तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर वह राशि कहां खर्च हो रही है?क्या योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं,या फिर कहीं न कहीं लापरवाही और जवाबदेही का अभाव है?यह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का विषय बनता है।

विद्यालय के प्राचार्य दिनेश कुमार का कहना है कि डेस्क-बेंच,अतिरिक्त वर्ग कक्ष और अन्य आवश्यक सुविधाओं की मांग को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित वरीय अधिकारियों को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया गया,लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि यह दावा सही है,तो जिम्मेदारी केवल विद्यालय की नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की भी बनती है।आज सवाल सिर्फ डेस्क-बेंच का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है,जो बच्चों को बेहतर शिक्षा का अधिकार तो देती है, लेकिन उन्हें सम्मानपूर्वक बैठने की जगह भी उपलब्ध नहीं करा पाती।

उठ रहे बड़े सवाल:–

:--जब शिक्षा विभाग विद्यालयों को राशि उपलब्ध कराता है, तो मूलभूत सुविधाओं का अभाव क्यों?

:–1100 से अधिक विद्यार्थियों वाले विद्यालय में पर्याप्त डेस्क-बेंच और कक्ष क्यों नहीं?

:–अधिकारियों को कई बार सूचना देने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

:–क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?

स्थानीय लोगों ने प्रमुखता से रखी मांग:–

:–विद्यालय में तत्काल पर्याप्त डेस्क-बेंच उपलब्ध कराई जाए

:–अतिरिक्त वर्ग कक्ष और बिजली की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

:--शिक्षा विभाग द्वारा आवंटित राशि और उसके उपयोग की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

:–दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए

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