Homeपाकुड़एलीट पब्लिक स्कूल में वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन,नालंदा सदन बनी विजेता
Maqsood Alam
(News Head)

एलीट पब्लिक स्कूल में वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन,नालंदा सदन बनी विजेता

विद्यार्थियों में तार्किक सोच, आत्मविश्वास व नेतृत्व क्षमता का विकास करती है वाद-विवाद प्रतियोगिता- अरविंद साह

Gunjan Saha
(Desk Head)

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समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होता, बल्कि विद्यार्थियों में स्वतंत्र चिंतन, तार्किक दृष्टिकोण, प्रभावशाली अभिव्यक्ति और स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद की भावना विकसित करना भी होता है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए एलीट पब्लिक स्कूल के ऑडिटोरियम हॉल में शनिवार को अंतर सदन वाद-विवाद प्रतियोगिता का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान सभागार ज्ञान, तर्क, आत्मविश्वास और ओजस्वी वाणी की गूंज से जीवंत हो उठा। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात प्रेरणादायी संबोधन में विद्यार्थियों को बताया गया कि वाद-विवाद का उद्देश्य किसी को पराजित करना नहीं, बल्कि विचारों का आदान-प्रदान, तार्किक सोच का विकास और सत्य की खोज करना है। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को निर्भीक होकर अपने विचार रखने तथा दूसरों के मत का सम्मान करने का संदेश दिया.इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय “क्या विशेष गहन पुनरीक्षण उचित है या अनुचित? रखा गया, जो वर्तमान समय का एक अत्यंत चर्चित एवं विचारणीय विषय है। इस विषय पर विद्यालय के नालंदा सदन, विक्रमशिला सदन, तक्षशिला सदन एवं पंचशिला सदन के प्रतिभागियों ने पक्ष एवं विपक्ष में अपने विचार अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने अपने तर्कों को तथ्यों, समसामयिक उदाहरणों, संवैधानिक मूल्यों तथा तार्किक विश्लेषण के आधार पर प्रस्तुत किया। उनकी स्पष्ट वाणी, आत्मविश्वास, भाषा की शुद्धता तथा प्रभावशाली प्रस्तुति ने उपस्थित सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को प्रभावित किया। कई अवसरों पर उनके सशक्त तर्कों पर पूरा सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों का मूल्यांकन विषय-वस्तु की गुणवत्ता, तर्कशक्ति, भाषा की शुद्धता, प्रभावी प्रस्तुति, आत्मविश्वास, समय-प्रबंधन एवं मंच संचालन की क्षमता के आधार पर किया। कड़े एवं निष्पक्ष मूल्यांकन के उपरांत नालंदा सदन को विजेता घोषित किया गया। विजेता टीम में सिद्धार्थ रबीदास, अंबर हुसैन, स्वप्नदीप राय एवं मानित प्रिया शामिल रहे, जिन्होंने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से निर्णायकों एवं दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं विक्रमशिला सदन ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उपविजेता बनने का गौरव प्राप्त किया। इस टीम में रणबीर रबीदास, समृद्धि सिन्हा, भूमि श्रेया एवं शिवम साहा ने अपने तार्किक एवं संतुलित विचारों से विशेष पहचान बनाई। विजेता एवं उपविजेता टीमों को ट्रॉफी एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक अरविंद साह, सह-निदेशक अनुपम आनंद तथा प्रधानाचार्य अभिजीत राय की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। विद्यालय के निदेशक अरविंद साह ने कहा कि वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में तार्किक सोच, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करती हैं। ऐसे मंच भविष्य के जागरूक नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।सह-निदेशक अनुपम आनंद ने कहा कि वाद-विवाद जीत-हार का नहीं, बल्कि विचारों को सम्मानपूर्वक और तर्कसंगत ढंग से प्रस्तुत करने का सशक्त माध्यम है। प्रत्येक प्रतिभागी अपने साहस और अभिव्यक्ति के लिए बधाई का पात्र है।प्रधानाचार्य अभिजीत राय ने विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को नई दिशा देते हैं तथा उन्हें आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और प्रभावशाली वक्ता बनने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी का प्रयास सराहनीय है, क्योंकि प्रतियोगिता का वास्तविक उद्देश्य व्यक्तित्व का विकास, आत्मविश्वास का निर्माण और ज्ञान के प्रति जिज्ञासा को बढ़ावा देना है।कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के सभी शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता और अनुशासित व्यवस्था उल्लेखनीय रही।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के अंग्रेजी विभाग के स्नातकोत्तर शिक्षक बिट्टू लाल की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। प्रतियोगिता की रूपरेखा तैयार करने, प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करने तथा कार्यक्रम के सफल एवं अनुशासित संचालन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। पूरे आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र नहीं, बल्कि उत्कृष्ट व्यक्तित्व, प्रभावशाली नेतृत्व और जागरूक नागरिकों के निर्माण की एक सशक्त पाठशाला भी है। अंत में उपस्थित सभी ने प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। यह प्रतियोगिता केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि विचारों की शक्ति, लोकतांत्रिक संवाद, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का प्रेरणादायी उत्सव बन गई। निस्संदेह, ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य का प्रभावशाली वक्ता, जागरूक नागरिक और जिम्मेदार नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में नई ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान करते हैं।

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