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अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। सदर प्रखंड के लखीनारायणपुर गांव में शुक्रवार की मध्यरात्रि सियार ने तीन माह की एक दुधमुंही बच्ची को उठाकर ले जाकर अपना शिकार बनाया। इस दर्दनाक घटना ने केवल लखीनारायणपुर गांव ही नहीं, बल्कि जहां तक यह खबर पहुंची, वहां के लोगों को भी रुला दिया। इस घटना में भुख मिटाने में सियार की क्रुरता और मासुम बच्ची की पीड़ा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बच्ची के शव का एक छोटा सा अवशेष ही बच गया था। जो सिर के हिस्से का था और कुछ उंगलियां बची हुई थी। हालांकि ग्रामीण इलाकों में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी सियार के कई बार हमले हो चुके है। आज से करीब सात साल पहले सकरघाट और गंधाईपुर गांवों में भी सियार के हमलों की ऐसी दर्दनाक घटनाएं सामने आ चुकी है। दरअसल यह इलाका खेतों और झाड़ियों के पास अवस्थित है। इन इलाकों के खेतों और झाड़ियों में सियारों का झुंड सक्रिय रहता है। अक्सर ही रात के अंधेरे में सियार गांव में घुसकर बच्चों को निशाना बनाते हैं। पुलिस और वन विभाग ग्रामीणों को सचेत भी करती रहती है। घरों को बंद रखने की सलाह भी दी जाती है। इसके बावजूद थोड़ी सी भी चूक से बच्चों की जान चली जाती है। इन इलाकों में सियार हमेशा मौके की तलाश में रहता है। इसलिए वन विभाग और पुलिस ग्रामीणों को जागरूक करती रही है। बता दें कि लखीनारायणपुर गांव में शुक्रवार की रात करीब 3:00 बजे तीन माह की आफिफा खातून को मां की गोद के पास से सियार उठाकर ले गया। मां की नींद खुली तो बच्ची को पास में नहीं पाकर चिल्लाने लगी। आवाज सुनकर आसपास के लोग जमा हुए। लोगों ने जब खोजना शुरू किया तो पास में एक झाड़ी में बच्ची के शव का कुछ अवशेष पड़ा मिला। दुमका में शव का पोस्टमार्टम रविवार को किया गया। इस मामले में मुफ्फसिल पुलिस ने मानवता का परिचय देते हुए काफी गंभीरता दिखाई। थाना प्रभारी गौरव कुमार घटना को लेकर काफी गंभीर दिखें।
कब-कब हुए सियार के हमले
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केस स्टडी वन:
सदर प्रखंड के सकरघाट गांव में साल 2018 में तीन माह की एक मासूम को भी सियार ने निशाना बनाया था। इस बार भी मां नायमा बीवी अपनी मासूम बच्ची सुमैया खातून के साथ पति नूरजमान शेख के फरसा गांव से सकरघाट मायके आई हुई थी। इसी दौरान एक रात जब मां नायमा बीवी अपनी बच्ची के साथ सोई हुई थी, तभी पास के खेतों से सियार का झुंड घर में घुस आया और चुपके से मासुम सुमैया को नींद में मां की गोद से उठाकर ले गया। मां निश्चित होकर सो रही थी, लेकिन अचानक ही जब नींद टूटी तो उनके होश उड़ गए। अपने पास साथ लेकर सोई सुमैया बिस्तर से गायब थी। अपनी बच्ची को बिस्तर में नहीं पाकर मां नायमा बीवी रोने बिलखने और चिल्लाने लगी। उनकी रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए। आस पड़ोस के ग्रामीण उनके घर पहुंचे और जानकारी मिलने पर सभी मिलकर बच्ची की खोजबीन में जुट गए। इधर-उधर खोजते खोजते ग्रामीण खेतों में एक जगह पहुंचे, जहां मासूम सुमैया खातून के शव का कुछ अवशेष ही पड़ा हुआ था। पहनावे से सुमैया की पहचान होने के बाद ग्रामीण शव के अवशेष को उठाकर घर लाया। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसर गया। वहीं घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया। लोग रात जाग जाग कर बच्चों की पहरेदारी करने लगे। उस दौरान ग्रामीणों से बातचीत में जानकारी मिली थी कि अक्सर ही सियार खेतों से निकलकर घरों में घुस जाते हैं और छोटे बच्चों तथा मवेशियों को भी शिकार बनाने का प्रयास करता है। हालांकि इस दर्दनाक घटना के बाद भी वन विभाग से पीड़ित परिवार को किसी तरह का मुआवजा नहीं मिला। आज भी यह परिवार घटना को याद कर सिहर उठते हैं।
केस स्टडी टू:
सदर प्रखंड अंतर्गत गंधाईपुर में भी इसी साल 2018 में सकरघाट की घटना के ठीक तीन दिन बाद 6 महीने की एक और बच्ची को सियार ने निशाना बनाया। इस रात खाना खाने के बाद सभी घर में सो गए। देर रात खेतों से सियार घर में घुस आया और 6 महीने की मासूम माहिया खातून को उठाकर ले जाने लगा। सियार ने जैसे ही बच्ची को अपने मुंह से दबाकर ले जाना शुरू किया बच्ची रोने लगी और उसके पिता शोहिद शेख की नींद टूट गई। पिता शोहिद शेख तुरंत सियार के पीछे-पीछे दौड़े और एक गड्ढे में गिर गए और सियार भी उसी गड्ढे में गिर गया। जिससे बच्ची सियार के मुंह से छूट कर नीचे गिर गई। इसके बाद सियार भाग गया। पिता ने अपनी बच्ची को सियार के चंगुल से बचा तो लिया, लेकिन बच्ची इस तरह जख्मी हो गई कि 21 दिनों तक मौत से लड़ती रही और आखिरकार 21 वें दिन बच्ची ने हार मान ली। पहले सदर अस्पताल में इलाज हुआ। इसके बाद रांची ले जाया गया। वहां से फिर वापस पाकुड़ लाया और सरकारी विभाग में इलाज के बाद घर लेकर गया। घर में बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद गांव में लगातार सियार का हमला जारी रहा। कई लोगों को सियार ने हमला कर जख्मी कर दिया। जिससे गांव में दहशत का माहौल बन गया। वन विभाग की टीम गांव पहुंची और लोगों को सियार से बचने का तरीका और सलाह भी दिया।


