Homeपाकुड़जाम का जंजाल: ​सायरन बजाती एंबुलेंस,कराहती व्यवस्था, जाम से सहमा शहर
Maqsood Alam
(News Head)

जाम का जंजाल: ​सायरन बजाती एंबुलेंस,कराहती व्यवस्था, जाम से सहमा शहर

समाचार चक्र संवाददाता

​पाकुड़। शहर के रेलवे फाटक की जगह बने सब-वे को जोड़ती संकरी रास्ता अब हर सुबह स्थानीय लोगों, राहगीरों और मरीजों के लिए आफत बन चुकी है। कहने को तो करीब पांच-छह साल पहले रेलवे फाटक को स्थाई रूप से बंद कर सब-वे चालू कर दिया गया था, ताकि आवाजाही आसान हो। लेकिन धरातल पर नजारा बिल्कुल उलट है। हर दिन लगने वाली जाम राहगीरों के लिए जी का जंजाल बन गया है। फाटक के दोनों ओर खास कर सुबह 9:00 से 10:00 बजे के बीच यहां ऐसा भीषण जाम लगता है कि पूरी व्यवस्था की पोल खुलकर सामने आ जाती है। यह समय स्कूल, ऑफिस या कोर्ट कचहरी का होता है। जिस वजह से यह रास्ता काफी ज्यादा व्यस्त हो जाता है। बता दें कि ​सब-वे का यह मार्ग पहले से ही बेहद संकरा है, ऊपर से सड़क किनारे सजी अवैध दुकानें और बेलगाम दौड़ते टोटो-ऑटो ने स्थिति को नारकीय बना दिया है। पश्चिम में खुदीराम बोस चौक से लेकर पूर्व दिशा तक और उत्तर में मालगोदाम रोड तक सड़क के दोनों ओर अस्थाई सब्जी, फल और नाश्ते की दुकानें सजी रहती हैं। मालगोदाम रोड की हालत तो और भी बदतर है, सड़क इतनी पतली है कि दो चौपहिया वाहन आमने-सामने आ जाएं तो शहर की रफ्तार थम जाती है।

​एंबुलेंस में तड़पते मरीज, बेबस जनता और दफ्तर जाते लोग

​जाम का सबसे डरावना पहलू तब सामने आता है, जब इसमें कोई एंबुलेंस फंस जाती है। गंभीर रूप से बीमार मरीजों और प्रसव पीड़ा से तड़पती महिलाओं के लिए एक-एक सेकेंड की कीमत होती है, लेकिन इस संकरी सड़क पर एंबुलेंस घंटों सायरन बजाती रह जाती है। इसके अलावा, रोजाना कोर्ट जाने वाले अधिवक्ता, आम जनता, अस्पताल पहुंचते मरीज और समय पर दफ्तर पहुंचने की जद्दोजहद में लगे आम नागरिक इस कुव्यवस्था की बलि चढ़ रहे हैं।

​अतिक्रमण पर ‘मौन सहमति’ और टोटो चालकों की दबंगई

सूत्रों का कहना है कि इस बेकाबू जाम के पीछे रेलवे के ही कुछ कर्मियों और अधिकारियों की ‘मौन सहमति’ की चर्चा है। चूंकि जमीन रेलवे की है, इसलिए कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। सूत्रों की मानें तो जब भी रेलवे के किसी बड़े अधिकारी का पाकुड़ दौरा होता है, तो रातों-रात दुकानें हटवाकर रास्ता साफ कर दिया जाता है। अधिकारी के जाते ही दुकानें फिर से सज जाती हैं और वसूली का खेल चालू हो जाता है।​दूसरी ओर, तेज रफ्तार से दौड़ रही टोटो, नाबालिग चालकों की मनमानी, कोई ड्रेस कोड न होना और बेतरतीब तरीके से कहीं भी गाड़ी खड़ी कर देने की आदत ने रही-सही कसर पूरी कर दी है।

​कब जागेगा प्रशासन?

​सड़कें संकरी, दुकानें अवैध और ट्रैफिक सिस्टम राम भरोसे! ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन और यातायात विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि मालगोदाम रोड और सब-वे के आस-पास से तुरंत अतिक्रमण हटाया जाए, टोटो चालकों पर नकेल कसी जाए और व्यस्त घंटों में यहां स्थाई ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए।

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