समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। महेशपुर प्रखंड के युवा पत्रकार रमेश ठाकुर के आकस्मिक निधन से पूरे जिले के पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई। एक सक्रिय,मिलनसार और सहज स्वभाव के पत्रकार के असमय चले जाने से उनके साथी पत्रकारों के बीच गहरा दुःख है। सोमवार को जिला मुख्यालय स्थित सूचना भवन सभागार में पत्रकारों एवं जनसंपर्क विभाग के पदाधिकारियों ने शोकसभा आयोजित कर दिवंगत पत्रकार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।शोकसभा में प्रभारी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अमरेंद्र चौधरी,एसएमपीओ पवन कुमार सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। सभी ने दो मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय रमेश ठाकुर की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।इस अवसर पर प्रभारी जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने कहा कि युवा पत्रकार रमेश ठाकुर के निधन की खबर बेहद पीड़ादायक है।उन्होंने कहा कि रमेश ठाकुर पिछले करीब 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय थे।अपने सरल, सहज और मिलनसार व्यवहार के कारण उन्होंने पत्रकारिता जगत के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी अपनी अलग पहचान बनाई थी। उनका असमय जाना पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपनी मौजूदगी से ही रिश्तों में अपनापन पैदा कर देते हैं।रमेश ठाकुर भी ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे।उनके मधुर व्यवहार और सहज स्वभाव को उनके साथ काम करने वाले साथी लंबे समय तक याद रखेंगे।उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति तथा शोकाकुल परिजनों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।शोकसभा में मौजूद पत्रकारों ने भी रमेश ठाकुर से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा किया। किसी ने उनके मिलनसार स्वभाव को याद किया तो किसी ने उनकी पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता को। हर आंख में नमी थी और हर जुबान पर यही बात थी कि एक साथी चला गया, लेकिन उसकी यादें हमेशा साथ रहेंगी।शोकसभा के बाद पत्रकारों का एक प्रतिनिधिमंडल स्वर्गीय रमेश ठाकुर के घर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और दुःख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। पत्रकार साथियों की ओर से परिजनों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई।इस पहल ने पत्रकारिता जगत की उस मानवीय संवेदना को सामने रखा,जिसमें साथी पत्रकार केवल खबरों के लिए एक-दूसरे के साथ नहीं होते,बल्कि दुःख और संकट की घड़ी में भी एक परिवार की तरह साथ खड़े रहते हैं।रमेश ठाकुर का जाना निश्चित रूप से एक अपूरणीय क्षति है।उनकी पत्रकारिता,उनका व्यवहार और उनके साथ बिताए पल साथी पत्रकारों और परिचितों की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेंगे।
