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Maqsood Alam
(News Head)

बूढ़ीडूबा में नारी सम्मान हुआ तार – तार,गैर पुरुष के प्रेम में पड़ी ग्रामीणों ने विवाहित महिला को अर्धनग्न अवस्था में घुमाया गांव

पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर शुरू कर दी है विधि सम्मत कार्रवाई

Gunjan Saha
(Desk Head)

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ललन झा@समाचार चक्र

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अमड़ापाड़ा-बूढ़ीडूबा गांव में गत 26 जून शुक्रवार को कथित प्रेम प्रसंग में प्रेमी संग एक महिला को अर्द्धनग्न अवस्था में घुमाए जाने की घटना ने नारी अस्मिता को तार-तार कर रख दिया है। इससे जुड़े दर्जनों वीडियो क्लीप फेसबुक,इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पिछले पांच दिनों से वायरल हैं। इस तरह के अस्वीकार्य और विधि विपरीत हरकत ने खास कर आदिवासी समाज में महिलाओं की स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है।वर्तमान सभ्य समाज को झकझोर कर रख दिया है।हम पाषाण काल में नहीं बल्कि इक्कीसवीं शदी के आधुनिक और सभ्य समाज में जी रहे हैं। संविधान और कानून के व्यवस्था के बीच जी रहे हैं। क्या आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था इस मौजूदा दौर में किसी महिला की आबरू से खेलने,उन्हें शारीरिक -मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित करने की ईजाजत देता है ? इस देश में या राज्य में क्या कोई कानून से भी ऊपर है ? क्या इस सुनियोजित कांड को अंजाम देने वाला मास्टरमाइंड या संलिप्त लोग कानूनन कठोर दंड से बच जाएंगे ? ऐसे कई अन्य सवाल भी हैं,जिनके जवाब मिलने चाहिए। माना कि महिला विवाहित और बाल-बच्चेदार है। यह भी माना कि वह किसी विवाहित और बच्चे के पिता की प्रेमिका बन बैठी। यह भी सच है कि दोनों महीनों से लिव इन रिलेसन में हैं। यदि दो बालिग विवाहित महिला- पुरुष सहमति से अंतरंग संबंध में हैं तो यह सामाजिक व नैतिक अपराध हो सकता है, कानूनी नहीं ! ऐसे में विरोध का तरीका भी कानूनन ही होना चाहिए। किन्तु,बूढ़ीडूबा के ग्रामीणों ने कानून को अपने हाथ में ले सोशल मीडिया का गलत उपयोग करते हुए विवाहित प्रेमी जोड़े को समाज के बीच अर्द्धनग्न अवस्था में अंडरगारमेंट में लाठी-डंडे के साथ शारीरिक हिंसा करते हुए घुमाया। इस घोर निंदनीय घटना ने संपूर्ण आदिवासी समुदाय के साथ-साथ समाज के सभी वर्ग के महिला समुदाय को शर्मसार किया है।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस हुई गंभीर–

जानकारी के अनुसार ज्यों ही स्थानीय पुलिस को इस कांड की विधिवत सूचना मिली वो हरकत में आ गई। संबंधित गांव पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद बंधक बनाए गए प्रेमी जोड़े को अपनी अभिरक्षा में लिया।गांव में विधि-व्यवस्था बनी रहे, पुलिस ने कैम्प भी किया। पुलिस इंस्पेक्टर सह थाना इंचार्ज अनूप रोशन भेंगरा, सब इंस्पेक्टर चंदन कुमार सहित अन्य पुलिस पदाधिकारी व पर्याप्त बल गांव पहुंचे। गत सोमवार को एसडीपीओ विजय कुमार भी अमड़ापाड़ा पहुंचे और मामले पर नजर बनाए रखा। कनिय पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश भी दिया। जानकारी यह भी मिली कि पीड़ित महिला का ससुराल और मायके दोनों अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत अगल-बगल ही है।जबकि प्रेमी साहेबगंज जिले के बोरियो प्रखंड का है। जानकारी यह भी मिली कि पीड़िता को सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित करने का काम बूढ़ीडूबा में उसके पति के ईशारे पर किया गया है। हालांकि इस कांड में पीड़िता के बयान पर 49/2026 के तहत आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।सात को नामजद और ढाई दर्जन से अधिक अज्ञात को कांड का आरोपी बनाया गया है।

कांड में ग्राम प्रधान की भूमिका पर उठ रहे हैं सवाल—

प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित ग्राम प्रधान के घर दोनों को दो से तीन दिन तक बंधक बनाकर रखा गया था। ग्राम प्रधान को संज्ञान में रहते हुए ऐसी इतनी बड़ी सामाजिक व सार्वजनिक अमान्य क्रिया-कलाप या घटना पर उनकी खामोशी बड़ी बात है! प्रधान ने इस बड़ी घटना की जानकारी पुलिस प्रशासन को भी नहीं दिया था। ऐसे में चर्चा है कि इस कुकृत्य में उनकी भूमिका पारदर्शी नहीं है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस—

बूढ़ीडूबा की इस घटना ने सोशल मीडिया पर नई बहश छिड़ गई है। आदिवासी व अन्य वर्ग के प्रबुद्ध जन मीडिया के विभिन्न प्लैटफॉर्म पर इस कांड को नारी अस्मिता का घोर अपमान बता रहे हैं। इसे असंवैधानिक बताते हुए प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आदिवासी समाज के ही पढ़े-लिखे युवा अपने समुदाय के ऐसे लोगों को अनपढ़ और असभ्य बता रहे हैं। सभी इस घटना की कड़ी निंदा कर रहे हैं और अपनी सभ्यता व संस्कृति की रक्षा व संवर्द्धन की वकालत कर रहे हैं।वो यह मान रहे हैं कि यह संबंध सामाजिक और नैतिक रूप से गलत है। किन्तु, विरोध भी कानूनी दायरे में हो, इसका समर्थन भी कर रहे हैं।

क्या कहा मुखिया ने–

संबंधित जड़ाकी पंचायत के मुखिया साहेबजन टुडू ने इस शर्मनाक घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारे देश का संविधान किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं देता। अगर समस्या बड़ी है तो हमें प्रशासन में जाना चाहिए। इस सुनियोजित कांड की जितनी निंदा की जाय कम है। आदिवासी संस्कृति और नारी का सम्मान हर हाल में होना चाहिए। वैसा कोई भी कृत्य नहीं हो,जिससे हमें लज्जित होना पड़े।

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