विज्ञापन

अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। सदर प्रखंड अंतर्गत लखीनारायणपुर गांव में सियार का हमला लगातार जारी है। एक के बाद एक हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। सियार बच्चों को निशाना बनाकर हमले कर रहा है। वहीं मवेशियों को भी अपना निशाना बना रहा है। जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। यूं कहे कि सियार का आतंक कम होता नहीं दिख रहा है। पहले तो सियार ने शुक्रवार की रात तीन माह की बच्ची अफीफा खातून को निवाला बनाया। इसी रात मृत अफीफा खातून की सगी बहन चार साल की जस्मीन खातून पर हमला कर जख्मी कर दिया। अगले ही दिन शनिवार की रात सियार का झुंड एक बकरे को उठाकर ले गया। इधर रविवार की आधी रात को सियार ने पांच साल के एक बच्चे पर अटैक कर दिया और उठाकर ले जाने का प्रयास किया। किस्मत अच्छी रही कि परिजन जाग गए और बच्चे को बचा लिया। पीड़ित पिता सादीकुल शेख और मां बेली बीवी बेटा जुबाईर शेख के साथ रात्रि में खाना खाकर सो गया। रात करीब 3:00 बजे के आसपास सियार घर में घुस आया और बेटे को उठाकर ले जाने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान बेटे के रोने की आवाज सुनकर हमारी नींद टूट गई। देखा तो सियार बेटे को ले जाने का प्रयास कर रहा है। किस्मत अच्छी थी कि हम लोग बेटे को सियार के हमले से बचा लिया। बताया कि सियार के हमले से बेटे के गर्दन और चेहरे पर जख्म हो गए हैं। बेटे को रात्रि में ही अस्पताल ले गए। अस्पताल में इलाज करा कर घर ले आए। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि सियार अब मवेशियों पर भी हमले कर रहा हैं। शनिवार की रात को सियार ने एक बकरे को अपना शिकार बना लिया। इसके बाद लोगों में और ज्यादा डर पैदा हो गया है। तीन माह की मासुम को सियार के शिकार बनाने की घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीण डर के साए में रात गुजारने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं सियार के झुंड दिन में भी दिखाई पड़ने लगे हैं। आनिकुल शेख, भोदन शेख सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार की रात एक बच्ची को सियार ने अपना शिकार बना लिया। दूसरी बच्ची को जख्मी कर दिया। इसके बाद लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। दोनों बच्ची के साथ दर्दनाक घटनाओं के बाद लोग रतजगा कर रहे हैं। लोग रात भर जाग जाग कर बच्चों की पहरेदारी करने को मजबूर हो रहे हैं। इधर दिन में भी गांव के आसपास खेतों और झाड़ियों में सियार के झुंड दिखाई पड़ने से लोगों में और ज्यादा डर का माहौल बन गया है। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग इस मामले को गंभीरता से लें। वन विभाग के अधिकारी ग्रामीणों की परेशानी को समझें और सियार के आतंक से निजात दिलाए। ग्रामीणों का कहना है कि मासूम बच्ची को अपना निवाला बना चुके सियार और ज्यादा सक्रिय हो गया है। इससे बच्चों में भी डर का माहौल बन गया है। परिजन तो डरे हुए हैं ही, बच्चों में भी काफी ज्यादा डर का माहौल है। परिजन बच्चों को ना घर पर अकेले छोड़कर कहीं जा पा रहे हैं और ना ही बच्चों को बाहर निकालने की इजाजत दे पा रहे हैं। इस तरह घर में दुबककर कितने दिन रहेंगे। वन विभाग के अधिकारियों को इसे संज्ञान में लेकर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। ग्रामीणों ने बताया कि मुफस्सिल पुलिस ने काफी ज्यादा मेहनत की है। इस मामले में थाना प्रभारी गौरव कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने ग्रामीणों को हिम्मत देने का काम किया है। अगर वन विभाग भी अपने स्तर से इसे संज्ञान में लें, तो ग्रामीणों की हिम्मत दोगुनी हो जाएगी। इधर भाजपा नेत्री अल्पसंख्यक राष्ट्रीय मंत्री डॉ मिसफीका हसन सोमवार को पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंची। परिजनों को ढांढस बंधाया और हिम्मत दिलाई।
विज्ञापन

विज्ञापन


