समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़।राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली की उम्मीद को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की स्मृति में पाकुड़ जिले के राज्यकर्मियों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। शहर के सिद्धू-कान्हू मुर्मू पार्क के समीप आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विभागों के सैकड़ों राज्यकर्मी एकजुट होकर शामिल हुए।कार्यक्रम के दौरान राज्यकर्मियों ने दिवंगत मंत्री के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सभी कर्मियों ने खड़े होकर दो मिनट का मौन रखा और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
कर्मचारियों के हित में लिए फैसले को किया याद—
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के हितों को लेकर दिवंगत मंत्री का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। विशेष रूप से पुरानी पेंशन बहाली योजना का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में उनकी भूमिका को कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण बताया। कर्मचारियों ने कहा कि पेंशन केवल सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा नहीं,बल्कि वर्षों तक सरकारी सेवा देने वाले कर्मियों के भविष्य और सम्मान से जुड़ा विषय है।
राज्यकर्मियों ने कहा कि दिवंगत मंत्री ने कर्मचारियों की भावनाओं और उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग को समझते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। यही कारण है कि उनके निधन से कर्मचारियों में गहरा शोक है।
एकजुट होकर दी श्रद्धांजलि—
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मौजूदगी ने दिवंगत मंत्री के प्रति उनके सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव को प्रदर्शित किया। अलग-अलग विभागों से पहुंचे कर्मियों ने कहा कि दिवंगत मंत्री की यादें और कर्मचारियों के हित में किए गए कार्य लंबे समय तक लोगों के बीच जीवित रहेंगे।श्रद्धांजलि सभा का माहौल पूरी तरह भावुक रहा। बड़ी संख्या में मौजूद कर्मचारियों ने मौन खड़े होकर दिवंगत मंत्री को अंतिम नमन किया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने उनके योगदान को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने और कर्मचारी हितों के प्रति एकजुट रहने का संकल्प लिया।शिक्षक शमसेर आलम ने कहा कुछ लोग पद पर रहते हुए काम करते हैं, लेकिन कुछ अपने काम से लोगों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना लेते हैं। सुदिव्य कुमार सोनू को राज्यकर्मियों की यह श्रद्धांजलि उसी सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति रही।”

