Homeपाकुड़जब शिकारी ही फंस गया शिकार के बिल में!महेशपुर के छिलमपुर में...
Maqsood Alam
(News Head)

जब शिकारी ही फंस गया शिकार के बिल में!महेशपुर के छिलमपुर में प्रकृति का अनोखा नज़ारा

Gunjan Saha
(Desk Head)

विज्ञापन

add

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़-प्रकृति के रहस्य और उसके अद्भुत संतुलन को समझ पाना आसान नहीं है।महेशपुर प्रखंड के छिलमपुर गांव में ऐसी ही एक दुर्लभ घटना देखने को मिली,जिसने ग्रामीणों को हैरान कर दिया।यहां एक ओर जहां एक चूहा अपनी जान बचाने के लिए बिल में घुसने की कोशिश कर रहा था,वहीं उसका पीछा करते हुए पहुंचा एक खतरनाक स्पेक्टेकल्ड कोबरा (चश्माधारी नाग)। लेकिन कहानी में ऐसा मोड़ आया कि शिकारी खुद ही मुश्किल में पड़ गया।

विज्ञापन

add

विज्ञापन

add

मौत से बचने की आखिरी कोशिश—

ग्रामीणों के अनुसार, छिलमपुर निवासी असगर शेख के आंगन में एक चूहा तेजी से भागते हुए अपने बिल में शरण लेने का प्रयास कर रहा था। तभी करीब साढ़े चार फीट लंबा और 12-13 वर्ष पुराना चश्माधारी नाग वहां पहुंच गया। कोबरा ने फुर्ती दिखाते हुए चूहे को दबोच लिया और कुछ ही क्षणों में उसे निगल गया।

शिकार तो मिला,लेकिन बढ़ गई मुसीबत

चूहे को निगलने के बाद कोबरा का पेट फूल गया और शरीर का आकार पहले से बड़ा हो गया। इसके बाद उसने भी उसी बिल में प्रवेश करने की कोशिश की,लेकिन बिल का मुंह छोटा होने के कारण वह अंदर नहीं जा सका।यही वह पल था जिसने पूरे घटनाक्रम को बेहद रोचक बना दिया। जो कोबरा कुछ मिनट पहले तक शिकारी था,वह अब खुद एक तरह से फंस चुका था। ग्रामीणों ने पहली बार ऐसा दृश्य देखा,जहां शिकार को निगलने के बाद शिकारी अपनी ही भूख की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहा था।

गांव में जुटी भीड़,बढ़ी दहशत

खतरनाक नाग को आंगन में फंसा देख ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। लोगों में भय भी था और कौतूहल भी। कई लोग दूर से इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते रहे।

रेस्क्यू टीम ने संभाली कमान—

सूचना मिलने पर स्थानीय सर्प रेस्क्यूअर अशरफुल शेख मौके पर पहुंचे। कोबरा की आक्रामक प्रवृत्ति और उसकी स्थिति को देखते हुए रेस्क्यू आसान नहीं था।काफी सावधानी और मेहनत के बाद अशरफुल शेख ने कोबरा को सुरक्षित तरीके से अपने कब्जे में लिया।उन्होंने बताया कि चश्माधारी नाग भारत के सबसे विषैले सांपों में से एक है और ऐसे सांपों को पकड़ने के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। बाद में कोबरा को सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की प्रक्रिया अपनाई गई।प्रकृति का अनोखा संदेश यह घटना सिर्फ एक सांप और चूहे की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति के उस अद्भुत संतुलन की मिसाल है जहां हर जीव अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करता है। कभी शिकारी जीतता है,तो कभी परिस्थितियां उसे भी असहाय बना देती हैं।छिलमपुर की यह घटना ग्रामीणों के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच चर्चा का केंद्र है कि “जिस बिल में चूहा बचने के लिए भागा था,उसी बिल के बाहर उसका शिकारी फंस गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

RELATED ARTICLES

Recent Comments