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Maqsood Alam
(News Head)

निजी कोल कंपनियां और कारपोरेट सेक्टर्स लूट रहे हैं आदिवासियों की जमीन- वृंदा करात

ललन झा@समाचार चक्र

अमड़ापाड़ा। भारत की कम्यूनिस्ट राजनेता (सीपीआईएम- पोलित ब्यूरो सदस्य) सह पूर्व राज्यसभा सदस्य बृंदा करात रविवार को अमड़ापाड़ा पहुंची। बढ़ता विस्थापन, चौपट होती खेती, जानलेवा प्रदूषण एवं बढ़ती दुर्घटनाओं के खिलाफ संताल प्रमंडल क्षेत्र में जन आक्रोष जत्था व जन सुनवाई का अगुवाई कर रही आदिवासी, समाज के शोषित, वंचित, पीड़ित तबकों व महिला अधिकारों के संघर्ष के लिए विख्यात करात ने पचुवाड़ा कोयला खादानों के द्वारा खनन का स्थानीय जनता पर प्रभाव सर्वेक्षण रिपोर्ट के परिप्रेक्ष्य में बात किया। अपने विचारों को साझा करते हुए बताया कि जनता आगामी 24 मार्च को दिल्ली रैली में भारी तादाद में हिस्सा लें। इनकी समस्याओं को कोल मिनिस्ट्री में रखा जाएगा। बताया कि विस्थापन व पुनर्वास संताल प्रमंडल के खासकर पाकुड़ व गोड्डा जिलों के लिए एक बड़ी समस्या बन चुकी है। फॉरेन कंपनीज और कॉरपोरेट सेक्टर्स की नजर यहां की जमीन और खनिज संपदा पर है। ये नीजी कंपनियां जिन्हें कोल ब्लॉक आवंटित हैं, एसपीटी एक्ट की धज्जियां उड़ा रही हैं। रैयतों की जमीन लूट ली गई है। पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड के आदिवासी रैयत कंपनी के विरुद्ध मुंह तक नहीं खोल पा रहे हैं। कामगारों के हित व रैयतों के अधिकारों को कुचला जा रहा है। प्रदूषण चरमोत्कर्ष पर है। पर्यावरण संतुलन बिगड़ता चला जा रहा है। जमीनें बंजर हो रही हैं। पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड का दिशा-निर्देश महज कागजों तक सीमित रह गया है। सीपीआई (एम) यहां के इन ज्वलंत समस्याओं पर निरंतर अभियान चला रही है। आदिवासी अधिकार मंच की एक टीम ने प्रभावित इलाके का सर्वे कर एक रिपोर्ट जारी किया है। इसी क्रम में आक्रोष जत्था निकाल जन सुनवाई आयोजित की जा रही है, ताकि इनके खिलाफ आगे एक प्रभावी आंदोलन खड़ा किया जा सके।

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